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NCTE और शिक्षामित्र: यूपी 2009 से शुरू हुई शिक्षामित्र भाईयों/बहिनों पर राजनीति

NCTE और शिक्षामित्र: यूपी 2009 से शुरू हुई शिक्षामित्र भाईयों/बहिनों पर राजनीति:-


उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रो पर राजनीत शुरू हुई वर्ष 2009 में जब भारत सरकार ने यूपी सरकार से कहा की RTE लागू हो रहा है जो लोग संविदा पर रखे गये है उन्हें आगे चल कर हटाना पड़ेगा इस लिए जो लोग इस समय किसी भी योजना में रखे गये है वह लोग अगर स्नातक पास है तो उनकी सूची और सख्या की जानकारी दे। यूपी सरकार ने कहा हमारे यहा सर्व शिक्षा अभियान और बेसिक शिक्षा योजना में शिक्षामित्र कार्यकर रहे है। और कोई योजना पर किसी को नही रखा गया है यह काफी समय से 11 माह के मानदेय पर कार्य कर रहे है इनकी योग्यता इंटर थी लेकिन जानकारी अनुसार बहुत से लोग स्नातक पास है निर्देश मिलते ही पहली बार 2010 में सभी स्नातक पास की एक फाइल BRC के माध्यम से जमा कराई गई । स्नातक पास शिक्षामित्रो की सख्या 124000 निकली पूर्व की बसपा सरकार ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय सूची भेज दी। उस सूची में स्नातक पास के साथ इंटर पास की भी सूचि भेज दी गई। भारत सरकार ने शिक्षामित्रो की भर्ती पर रोक लगाते हुए आदेश जारी किया की शिक्षामित्र योजना जून 2010 में बन्द कर दी जायेगी। अवशेष 46000 शिक्षामित्र राज्य के आधीन रहेगे MHRD की तरफ से इन्हे कोई भुगतान नही हो पायेगा इनकी व्यवस्था राज्य सरकार को करनी होगी और कहा यह चाहे तो स्नातक की योग्यता ग्रहण कर सकते है। और स्नातक पास शिक्षामित्र जुलाई माह से अध्यापक उपस्थिति रजिस्टर पर अपने साइन करेगे इनका नया पद अप्रशिक्षित अध्यापक ( पैराटीचर ) होगा इनका वेतन 5000 रुपये प्रति माह 12 महीने का विभाग की तरफ से होगा राज्य सरकार अपना अंशदान देकर इन्हे भुगतान करे। यही से राजनीत शुरू हो गई कोई भी संगठन यह नही चाहता था की इन्हे 5000  और अवशेष को 3500 मानदेय मिले यह सब चलता रहा सरकार ने ऑन पेपर अपना काम करना शुरू कर दिया फिर 2011 में राज्य सरकार को आदेश मिला की 124000 SM को DBTC कराई जायेगी नेताओ ने दवाब बनाया की सभी की ट्रेनिग का आदेश करो और सभी का मानदेय बढ़ाया जाये सरकार ने कहा ट्रेनिग का कोई पैसा आप से नही लिया जायेगा हम मानदेय नही बढ़ा सकते 5000 चाहो तो दिया जा सकता है लेकिन सभी को नही मिल सकता है केवल स्नातक पास को मिल सकता है। बात नही बनी और ट्रेनिग शुरू हो गई। सभी का मानदेय 3500 ही मिलता रहा। राज्य सरकार यहा कुछ और करती रही और MHRD, NCTE को कुछ और रिपोट भेजती रही इस लिए 124000 शिक्षामित्र भी अप्रशिक्षित अध्यापक ( पैराटीचर ) हो कर भी शिक्षामित्र संविदा कर्मचारी बने रहे।  RTE के पैरा 4 में यही कहा गया की प्रदेश में RTE जब लागू हुआ उससे पहले जो अप्रशिक्षित अध्यापक नियुक्त है उन्हें TET से छूट दी गई है। लेकिन यहा समायोजन का आदेश 172000 कार्यरत संविदा शिक्षामित्रो का बनाया गया इस लिए इनकी योग्यता इंटर बता कर कहा गया सभी स्नातक पास कर चुके है और दूरस्थ बीटीसी भी कर चुके है। हाईकोर्ट ने सपा सरकार का यह मन माना आदेश बता कर समायोजन रद्द कर दिया इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 को अपनी मोहर लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने यह जरूर अपने आदेश में कहा इन्हे पुराने पदों पर राज्य सरकार भेज सकती है वह पद शिक्षामित्र का भी हो सकता है इनके भविष्य का निर्धारण राज्य सरकार कर सकती है। हमारे अनुसार राज्य सरकार अगर चाहे तो अब भी कोई प्रस्ताव ला कर इन 124000 शिक्षामित्रो को NCTE की अनुमति लेकर पैराटीचर अप्रशिक्षित अध्यापक के पद पर भेज कर प्रशिक्षित अध्यापक के पद पर नियमित कर सकती है। और टेट की छूट प्राप्त की जा सकती है। और जिन्होंने बीए RTE लागू होने के बाद किया है उन्हें खुली भर्ती में मौका दे सकती है। यहा पर एक बात लिखना जरूरी हो गया है की NCTE ने केवल 124000 को ही सेवारत बीटीसी करने की अनुमति दी है और कोर्ट ने इनका बीटीसी प्रशिक्षण सही माना है। बाकि के प्रशिक्षिण पर NCTE को ही निर्णय लेने के लिए कहा गया था ।

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