Friday, May 22, 2020

ब्रेकिंग न्यूज़- कोविड-2019 के प्रबंधन में कार्मिकों की भूमिका के संबंध में आदेश जारी

Covid-19

Corona up

संख्या-2-ई.एम.2009/2010-का-4-2010
प्रेषक
मुकुल सिंहल.
अपर मुख्य सचिव,
उत्तर प्रदेश शासन।
सेवा में,
1. समस्त अपर मुख्य सचिव/ प्रमुख सचिव/सचिव,
उत्तर प्रदेश शासन।
2. समस्त मण्डलायुक्त/जिलाधिकारी,
उत्तर प्रदेश।
कार्मिक अनुभाग-4
लखनऊ : दिनांक : 22 मई, 2020
विषय कोविड-2019 के प्रबंधन में कार्मिकों की भूमिका के संबंध में।
महोदय,
राज्य सरकार के संज्ञान में आया है कि कतिपय संगठनों द्वारा कार्यस्थल पर विभिन्न प्रकार का प्रतिरोध
करने की संभावना है, जिससे कोविड-2019 के प्रबंधन का कार्य प्रतिकूल रूप से प्रभावित होगा, अतएव उत्तर
प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली 1956 तथा उत्तर प्रदेश (सेवा संघों को मान्यता) नियमावली
1979 की निम्नलिखित व्यवस्थाओं की ओर आपका ध्यान आकृष्ट किया जा रहा है:-
(क)उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली 1956 यथासंशोधित)
(1) नियम-3 के अनुसार प्रत्येक सरकारी सेवक हर समय अपनी डियूटी के प्रति पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण
रखेगा।
(2) नियम-5-1(2) कोई सरकारी सेवक अपनी सेवा या अन्य किसी सरकारी सेवक की सेवा संबंधी
मामलों में किसी भी प्रकार की हड़ताल के लिए न तो सहायता करेगा और न ही उसमें सम्मिलित होगा।
(ख)उत्तर प्रदेश(सेवा संघो को मान्यता) नियमावली 1979 यथा (संशोधित)
(1) नियम-4(ड) के अनुसार सेवा संघ कोई ऐसा कार्य न करेगा और न कोई ऐसा कार्य करने में सहायता
देगा जिसको यदि किसी सरकारी सेवक द्वारा किया जाय तो उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण
नियमावली 1956 के किसी उपबन्ध का उल्लंघन हो ।
(2) नियम-4(ढ) के अनुसार सेवा संघ समान्य और सुचारू रूप से सरकारी कार्य संचालन में बाधा डालने
या अवरोध उत्पन्न करने की दृष्टि से अपने सदस्यों को हड़ताल करने या धीरे कार्य करने या कोई अन्य
तरीका अपनाने के लिए न प्रेरित करेगा, न उकसायेगा, न भड़कायेगा, न उत्तेजित करेगा, न सहायता
और न सहयोग देगा।
(3) नियम-4(ण) के अनुसार सेवा संघ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी ऐसे कार्य में भाग नहीं लेगा
जिससे कि सरकारी सेवक को अपने कार्यालय आने या अपने पदीय कर्तव्य का पालन करने में अभित्रास
या अवरोध या रूकावट हो ।
(4) नियम-8 में यह व्यवस्था दी गई है कि यदि मान्यता प्राप्त संघ/महासंघ/परिसंघ उक्त वर्णित
नियम-4 में उल्लिखित उपरोक्त अपेक्षाओं/शर्ता का उल्लंघन करता है तो उसकी मान्यता वापस ली
जा सकती है।
2 उपर्युक्त नियमों/प्राविधानों से अपने नियंत्रणाधीन समस्त सरकारी सेवकों तथा मान्यता प्राप्त
संघ/महासंघ/परिसंघ को अवगत कराने का कष्ट करें । यह भी अवगत कराने का कष्ट करें कि धरना,
सांकेतिक प्रदर्शन, प्रर्दशन अथवा हड़ताल में शामिल होने की स्थिति में संबंधित सरकारी सेवक के विरुद्ध उत्तर
प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एव अपील) नियमावली-1999 के अर्न्तगत कार्यवाही की जायेगी ।
सम्यक विचारोपरान्त निम्नलिखित निर्णय लिये जा रहे हैं:-

(७) उपर्युक्त प्रस्तर-1 एवं-2 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुक्रम में प्रभावी कार्यवाही की जाय।
(2) धरना, सांकेतिक प्रर्दशन प्रदर्शन एवं हड़ताल में भाग लेने के कारण यदि संबंधित कार्मिक के द्वारा कार्य
नहीं किया जाता है तो ऐसे कार्मिकों को कार्य नहीं तो वेतन नहीं' के सिद्धांत के आधार पर संबंधित अवधि
का वेतन भुगतान न किया जाय।
(3) धरना, सांकेतिक प्रर्दशन, प्रदर्शन एवं हड़ताल में शामिल होने के उद्देश्य से अवकाश मांगने वाले कार्मिकों
का अवकाश स्वीकृत न किया जाय।
(4) कार्यालय आने वाले कार्मिकों को संरक्षण प्रदान किया जाय तथा व्यवधान डालने वाले कार्मिकों के विरूद्ध
उपरोक्तानुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जाय।
(5) कार्य बहिष्कार अथवा हडताल की स्थिति में अपने विभाग से संबंधित अत्यावश्यक सुविधायें बनाये रखे जाने
की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाय
(6) किसी अधिकारी को हड़ताल की अवधि में अवकाश स्वीकृत न किया जाय ।
मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि उपर्युक्त के आलोक में समुचित कार्यवाही सुनिश्चित करने का कष्ट
करें।
भवदीया
(मुकुल सिंहल)
अपर मुख्य सचिव

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