कोरोना वायरस को लेकर अभी स्कूलों में बच्चों के बुलाने का इंतजार और बढ़ सकता है. महामारी के थमने का इंतजार शैक्षिक सत्र शुरू होने के साथ महा बाद भी बच्चे स्कूलों से दूर हैं. सबसे ज्यादा नुकसान अधिक ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले संसाधन भी इन बच्चों का हो रहा है.
किताबी आंखों में भले गांव का मौसम गुलाबी होने की तस्वीर पेश की जा रही हो लेकिन दावे झूठे और मात्र किताबी ही हो रहे हैं खुद विभाग के आंकड़े ही खुलेआम दावों की पोल खोल रहे हैं.
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी सरकारी स्कूल में बच्चों तक ऑनलाइन कक्षाओं की पहुंच कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी है सरकारी प्राइमरी स्कूल में ऑनलाइन पढ़ाई की हालत धरातल पर उन्हें जनपद में 2% बच्चों को ही ऑनलाइन शिक्षण टॉप नहीं हो रहा है स्कूली शिक्षा महानिर्देशक ने दिए जनपद वार समीक्षा के बाद सुधार के निर्देश जारी किए थे.
लाखों प्रयासों के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों तक अपनी पहुंच नहीं बना पा रहा है. स्थिति यह है कि विभाग के दीक्षा एप से केवल 11% बच्चे ही ऑनलाइन पढ़ाई कर पा रहे हैं. वह भी शहरी क्षेत्र से सटे जनपदों में.
इधर विभाग की ओर से बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप में हर दिन की पाठशाला व दीक्षित के जरिए बच्चों को रोचक वीडियो बाई कंटेंट उपलब्ध कराए जाने की सामग्री परोसी जा रही है. बीते 7 माह से बच्चे स्कूल के साथ शिक्षण से पूरी तरह दूर बने हुए हैं अक्टूबर में शिक्षा विभाग ने दीक्षा एप से पढ़ाई का जो आंकड़ा पेश किया वह निराश करने वाला है.
पूरे सूबे में अक्टूबर माह तक दीक्षा ऐप के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चों की संख्या केवल 11% रही है वहीं सूबे के कई जिले में कानपुर देहात जनपद में एक प्रतिशत सभी बच्चों ने दीक्षा एप डाउनलोड नहीं किया है

