राजधानी में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, लेकिन अभी तक परिषदीय विद्यालयों के करीब 1.96 लाख बच्चों को शासन की तरफ से निशुल्क जूते और मोजे नहीं मिले हैं।
सर्दियां शुरू होने से पहले बच्चों के पैरों में जूते मोजे होने चाहिए थे, लेकिन अब तक कोई खेप नहीं आई है। शिक्षकों ने बताया कि बच्चों की सारी संख्या विभाग को बहुत पहले उपलब्ध करा दी गई है।
कोरोना काल में भी एक जुलाई से स्कूल खोले गए। मिड-डे मील का राशन, कुकिंग की लागत देने का कार्य किया गया। किताबें बंटवाई और अब स्वेटर भी बांट रहे हैं।
समय पर जूते-मोजे आ गए होते तो इसी दौरान अभिभावकों को दे दिया गया होता। बार-बार अभिभावकों को स्कूल न बुलाना पड़ता।
टेंडर में हुई देरी
विभागीय जानकारी के अनुसार, शासन की तरफ से जूतों के लिए टेंडर जारी करने में देरी हुई है। विभाग पर जूतों की लागत कम करने का दबाव था। बताया जा रहा है कि इस बार पिछले वर्षों के मुकाबले कम कीमत में में जूते मंगाए जा रहे हैं। वहीं, जूते-मोजे वितरण का कार्यक्रम तय न होने की वजह से भी यह अटका हुआ है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री द्वारा जूते वितरण का कार्यक्रम गोरखपुर में कराए कराए जाने की बात चल रही है। कार्यक्रम फाइनल न होने पर वितरण प्रक्रिया अभी ठप पड़ी है।
बच्चों को बस्ते भी नहीं मिले
इस बार बच्चों को विभाग की तरफ से बस्ते भी नहीं मिले हैं। इस संबंध में शासन से अभी कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हुआ है। बस्ता वितरित करने की प्रक्रिया की तैयारी को लेकर बेसिक शिक्षा कार्यालय में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
वितरण के लिए खेप नहीं आई
बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि शासन से सभी बच्चों को जूते-मोजे उपलब्ध कराने का आदेश तो आ गया है, लेकिन अभी तक वितरण के लिए खेप नहीं आई है।
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