प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कितनी विपरीत परिस्थितियां क्यों न हों, जिला अदालत के न्याय के दरवाजे जनता की पहुंच से बाहर नहीं रखे जा सकते। ऐसा करना न केवल पहले से जूझ रहे हाईकोर्ट पर मुकदमों का बोझ बढ़ाना है, अपितु कोविड में आर्थिक संकट का सामना कर रहे लोगों को हाईकोर्ट आने का खर्च उठाने को मजबूर करना है। कोर्ट ने कहा कि जब पुलिस अपराधियों को पकड़कर रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर सकती है और जेल भेज सकती है तो व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए जमानत अर्जी की सुनवाई के लिए अदालत क्यों नहीं बैठ सकती। अलीगढ़ जिला अदालत में जमानत अर्जी दाखिल करने में असमर्थ याची ने सीधे हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर सुनवाई की मांग की।
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› परिस्थितियां चाहे जितनी विपरीत हों, बंद नहीं कर सकते न्याय के दरवाजे- हाईकोर्ट

