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Sunday, August 1, 2021

सेवानिवृत्ति के बाद दंडित करने का आदेश रदृद, हाईकोर्ट ने कहा, रिटायरमेंट के 13 साल बाद फिर से जांच कराना औचित्यहीन

 प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारों के रिटायर होने के 13 साल बाद उसके विरुद्ध की गई कार्रवाई को रदूद कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि घटना के 18 साल बाद हुई जांच कार्यवाही में न्याय का पालन नहीं किया गया व कर्मचारी के सेवानिवृत्त हुए 13 साल बीत जाने के कारण नए सिरे से जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने विभागीय जांच में बिना सफाई का मौका दिए दंडित करने के आदेश को रदूद कर दिया है और कहा है कि याची सेवानिवृत्ति परिलाभ पाने का हकदार है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सूर्यपपाल कश्यप की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

 

सेवानिवृत्ति के बाद दंडित करने का आदेश रदृद, हाईकोर्ट ने कहा, रिटायरमेंट के 13 साल बाद फिर से जांच कराना औचित्यहीन

याची का कहना था कि वह फर्रुखाबाद जिला अदालत में क्लर्क पद पर कार्यरत था। 1988 में नरेंद्र कुमार बनाम शोभा कटियार केस कौ फाइल गायब हो गई, जिसकी शिकायत की गई तो जिला जज ने प्रारंभिक जांच सिविल जज सौनियर डिवीजन से कराई। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर नियमित जांच बैठाई गई। 27 फरवरी 2007 को चार्जशीट दी गई और दो दिन में 2 मार्च तक जवाब देने को कहा गया। याची की मांग पर 23 मार्च तक का समय दिया गया। कुछ दिन का और समय मांगा तो अर्जी निरस्त कर दी गई। दूसरे दिन जांच रिपोर्ट पेश की गई। याची को दोषी करार देते हुए रैंक में सबसे नीचे वेतनमान पर करने का दंड दिया गया। अपील भी प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने खारिज कर दी तो यह याचिका दायर की

गई। याची अधिवक्ता का कहना था कि उसे सफाई देने व सुनवाई का अवसर व गबाहों कौ प्रतिपरीक्षा करने का मौका नहीं दिया गया। न ही मौखिक सुनवाई की गई। उसकी 30 साल की सेवा बेदाग है। फाइल डिस्पैच रजिस्टर में चढ़ी है। फाइल भेजी गई है।

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