नई दिल्ली : अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की पहचान करने और सूची बनाने के राज्यों के अधिकार बहाल करने संबंधी संविधान का 127वां संशोधन विधेयक बुधवार को राज्यसभा से पारित हो गया। लोकसभा एक दिन पहले ही इसे मंजूरी दे चुकी है। विधेयक पर चर्चा के दौरान बुधवार को राज्यसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष में जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। विपक्ष ने सरकार पर ओबीसी के नाम पर सिर्फ दिखावा करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार का यह प्रेम विधानसभा चुनाव में फायदा लेने के लिए है। लेकिन सत्ता पक्ष ने इस पर विपक्ष को करारा जवाब देते हुए कहा कि हम विपक्ष जैसी राजनीति नहीं करते। जो ओबीसी की मदद से सत्ता में तो पहुंचे, लेकिन सत्ता में रहने के दौरान उनके लिए कुछ नहीं किया।
राज्यसभा में इस विधेयक पर पांच घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई। इस दौरान सभी राजनीतिक दलों ने विधेयक का समर्थन किया। यही वजह रही कि राज्यसभा में इसके पक्ष में कुल 187 मत पड़े, जबकि विपक्ष में एक भी मत नहीं पड़ा। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. वीरेंद्र कुमार ने सवालों का बेहद सधे ढंग से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग सामाजिक-आर्थिक जनगणना की रिपोर्ट जारी करने की मांग कर रहे हैं, वे जब सत्ता में थे तो ऐसा क्यों नहीं किया, जबकि यह रिपोर्ट उनके कार्यकाल में ही आ गई थी।संबंधित खबर पेज 13
’>>रास में विधेयक के पक्ष में पड़े 187 वोट, विरोध में शून्य वोट
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