परिषदीय स्कूलों के प्रांगण में स्थित जर्जर और निष्प्रयोज्य स्कूल भवन विद्यार्थियों के लिए खतरा बने हुए हैं। बारिश में भवनों की दशा और खराब हो गई है। हादसे का डर है। करीब दो वर्ष पहले शासनादेश जारी होने और प्रधानाध्यापकों की ओर से लगातार पत्र लिखने के बाद भी इन भवनों को ध्वस्त नहीं किया जा रहा है। विभाग के पास करीब 200 ऐसे स्कूलों की सूची प्राप्त हुई है, जिनके जर्जर भवनों को ध्वस्त किया जाना है।
बीएसए को लिखा था पत्र
शहर के प्राथमिक विद्यालय सोंठ की मंडी में प्रांगण में जर्जर स्कूल भवन खड़ा है। इसको ध्वस्त नहीं किया जा रहा है। विद्यार्थी जिस रास्ते विद्यालय में प्रवेश करते हैं, बाउंड्रीवाल भी जर्जर हो चुकी है। विद्यालय के नाम पर एक भवन का कक्ष है। इसका भी छज्जा टूटा हुआ है। वहीं, प्राथमिक विद्यालय, कंसखार में स्कूल भवन के सामने करीब 20 मीटर दूरी पर ही जर्जर भवन खड़ा है। स्कूल की ओर से कई बार प्रार्थनापत्र भवन को ध्वस्त करने के लिए लिखा गया है। इसके अलावा कंपोजिट विद्यालय नगला रामबल प्रांगण में जर्जर स्कूल भवन है। एक वर्ष से पहले भवन को ध्वस्त करने के लिए प्रधानाध्यापक ने बीएसए को पत्र लिखा था।
शासन ने दिए थे निर्देशकंपोजिट विद्यालय मालवीय कुंज, कंपोजिट विद्यालय रुई की मंडी प्रांगण में भी जर्जर स्कूल भवन ध्वस्त नहीं किए गए हैं। विद्यार्थी प्रांगण में खेलते हैं, हादसा होने का डर है। प्राथमिक विद्यालय, लादूखेड़ा प्रथम के जर्जर भवन को ध्वस्त करने के संबंध ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के जूनियर इंजीनियर की ओर से वर्ष 2019 में संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट दी गई थी। भवन को अभी तक ध्वस्त नहीं किया गया है। परिषदीय स्कूलों के प्रांगण में स्थित जर्जर व निष्प्रयोज्य भवनों को ध्वस्त करने के लिए 28 जून 2019 को विशेष सचिव, शासन आनंद कुमार सिंह की ओर से और छह जनवरी 2021 को महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से दिशा-निर्देश जारी किया गया था।
प्रार्थनापत्र देने के बाद भी भवन ध्वस्त नहीं किए जा रहे
निष्प्रयोज्य जर्जर स्कूल भवनों को ध्वस्त किए जाने के संबंध में प्रधानाध्यापकों की ओर से प्रार्थनापत्र दिए जाने के बाद भी विभाग की ओर से उसे ध्वस्त नहीं कराया जा रहा है। बारिश से ऐसे भवन और खतरनाक हो चुके हैं। सोमवार से स्कूल खुले जाएंगे। यदि विद्यार्थी खेलते-कूदते इन भवनों के पहुंच जाते हैं तो दुर्घटना होने का डर है। तत्काल ऐसे भवनों को गिराया जाना चाहिए। इन स्थानों पर खेल के मैदान बनाए जाने चाहिए। - राजीव वर्मा, जिलामंत्री, यूटा
शासनादेश का भी पालन नहीं किया जा रहा
‘जिले में करीब 500 स्कूलों के प्रांगण में जर्जर भवन खड़े हैं या फिर जिसमें पढ़ाई कराई जा रही है, वही स्कूल भवन जर्जर है। शासन दो वर्ष से ऐसे भवनों को चिह्नित करके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने का आदेश दे रहा है। विभाग की ओर से शासनादेश का पालन नहीं किया जा रहा है। भवनों के संबंध में जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में गंभीर हादसा हो सकता है।’ - बृजेश दीक्षित, जिलामंत्री, प्राथमिक शिक्षक संघ
15 से 20 दिन में निलामी की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी
‘विभाग की ओर से करीब 500 जर्जर स्कूल भवनों की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। इसमें विभिन्न विभागों की उच्च स्तरीय जांच समिति बनाई गई। उसने सत्यापन के बाद करीब 200 ऐसे स्कूलों की सूची विभाग को दी है, जिनको ध्वस्त कराया जाना है। 15 से 20 दिन में नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर जर्जर भवनों को ध्वस्त कराना शुरू कर दिया जाएगा। कुछ भवन ध्वस्त भी हुए हैं।’ - ब्रजराज सिंह, प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी

