फिरोजाबाद बी आरसी पर शिक्षकों का प्रशिक्षण, न शिक्षकों का गया ध्यान, न प्रशिक्षण देने वालों का
हॉल के अंदर बच्चों की पढ़ाई को लेकर मंथन चल रहा था। कैसे बच्चों को रोचक ढंग से पढ़ाया जाए कि बच्चे सीखें एवं स्कूल आने के लिए लालायित हों, लेकिन इसी प्रशिक्षण में लंच टाइम के दौरान शिक्षकों की झूठी प्लेटें एक बच्चा साफ करता रहा। यह नजारा सभी ने देखा लेकिन किसी भी शिक्षक ने इस बच्चे को टोककर स्कूल जाने की सलाह देना भी जरूरी नहीं समझा।
नगला श्रोती का निवासी यह बच्चा लॉकडाउन लगने से पहले कक्षा पांच का छात्र था, जो अब स्कूल नहीं जा रहा है। प्रशिक्षण में जिस ठेकेदार को खाना बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी, वही इस बच्चे को लेकर आया। कहने को स्कूल चलो अभियान के तहत शिक्षकों पर बच्चों को स्कूल भेजने की जिम्मेदारी है। ब्लॉक संसाधन केंद्र पर इसका पर्यवेक्षण करने वाले जिम्मेदार भी रहते हैं, लेकिन शायद सभी प्रयास सिर्फ औपचारिकता तक सिमटे हैं। इस बच्चे से किसी शिक्षक ने यह भी नहीं पूछा कि स्कूल जाता है या नहीं
बाल श्रम उन्मूलन कमेटी में बीईओ भी बताया जाता है बाल : श्रम उन्मूलन के लिए जो कमेटी बनती है, उसमें ब्लॉक स्तर पर बीईओ को भी शामिल किया जाता है। वह भी चाहें तो बाल श्रम दिखाई देने पर संबंधित सेवायोजक के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन जब बीआरसी पर बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यक्रम में ही काम करते हुए बच्चे बीईओ को नहीं दिख रहे तो अन्यत्र कहां रोकेंगे।
यह मामला हमारी जानकारी में नहीं है। अगर बच्चों से काम कराया जा रहा है तो गलत है। हम इसकी जानकारी करते हैं।
