बाजार में स्वेटर के दाम भी 200 से अधिक
औरैया। ठंड लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन परिषदीय स्कूलों में अभी भी बच्चे बिना जूते-मोजे और स्वेटर के पहुंच रहे हैं। दरअसल, 125 रुपये में जूते और मोजे खरीदने में अभिभावकों के पसीने छूट रहे हैं। वहीं जो अभिभावक बच्चों को ठंड से बचाने के लिए प्रयासरत हैं, उनके खातों में अभी तक पैसा नहीं पहुंचा है।
जिले में 1265 स्कूल संचालित हैं, इनमें एक लाख 16 हजार बच्चे पंजीकृत है। सरकार की योजना के तहत प्रत्येक अध्ययनरत बच्चे को 1100 रुपये की धनराशि, जूते- मोजे, ड्रेस, बैग लिए जा रही है। विभाग अब तक 71 हजार लोगों की डीबीटी किए जाने की बात कह रहा है।
जबकि जिन लोगों को डीबीटी की गई हैं, उनमें से 21 हजार अभिभावकों के खाते ऐसे मिले जो या मिसमैच हो गए या फिर उनके खातों में आधार लिंक नहीं है। लिहाजा 71 हजार में 21 हजार अभिभावकों के खाते में अब तक पैसा नहीं पहुंचा। विभाग के कुल आंकड़ों की बात की जाए तो एक लाख 16 हजार में अभी तक विभाग 51 हजार को ही धनराशि उपलब्ध करा सका है। इनको भी कम राशि में खरीदारी करना मुश्किल हो रहा है।
1100 रुपये में लेने हैं यह सामान
शासन की मंशा के अनुरूप परिषदीय स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के खाते में 1100 रुपये भेजे जा रहे हैं। जिसमें 600 रुपये में दो ड्रेस, 200 रुपये में स्वेटर, 175 रुपये में स्कूल बैग और 125 रुपये जूते-मोजे के लिए निर्धारित किए गए हैं।
खरीद करें तो कैसे
परिषदीय स्कूल में अपने बच्चों को शिक्षा दिला रहे सहार के रामसेवक, सौथरा के सुनील ने बताया कि बाजार में 125 रुपये में जूते-मोजे नहीं मिल पा रहे हैं। स्वेटर लेने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। बच्चों के साइज के स्वेटर 300 से 400 तक मिल रहे हैं। ऐसे में जो रुपये मिले हैं, उसी से कुछ सामान की कटौती करनी पड़ रही है।
बोले जिम्मेदार
जिन अभिभावकों के खाते में धनराशि पहुंच गई है, उन्हें सभी सामग्री खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ खामियों के चलते धनराशि स्थानांतरित नहीं हो सकी है, उसे जल्द ठीक कर एक दो दिन में अभिभावकों के खाते में रुपये भेज दिए जाएंगे
-चंदना राम इकबाल, बीएसए
यही कारण है की अब भी बच्चे स्कूल में बिना ड्रेस स्वेटर और जूते-मोजे के ठिठुरते हुए स्कूल पहुंच रहे है।
