बरामदे में बैठकर पढ़ते हैं बच्चे, सदीं में बढ़ जाती हैं मुश्किलें
फिरोजाबाद। परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिले के कई स्कूल ऐसे हैं जहां सर्दी के दिनों में बच्चों को कक्षा की चहारदीवारी भी नसीब नहीं हैं। बच्चे सर्द हवा में ठिठुरन के लाइव बीच बरामदे में पढ़ने के लिए मजबूर हैं। वहीं ज्यादातर बच्चों को इस बार स्वेटर, जूते, मोजे भी नहीं मिल पाए। इससे बच्चे सर्दी से जूझ रहे हैं।
प्राथमिक विद्यालय हिमांयूपुर
प्राथमिक विद्यालय हिमांयूपुर में तीन ही कक्ष हैं। कक्षा एक और दो के विद्यार्थी बरामदे में ही बैठते हैं। चल रही ठंडी हवाओं के बीच बच्चे ठिठुरते नजर आए। 95 फीसदी विद्यार्थियों के पास जूते, मौजे भी नहीं थे। बच्चें ठंड में टाट, पट्टियों पर बैठे थे। ऐसे में हर तरफ से ठंड का सामना करना पड़ रहा था। प्रधानाचार्य कमलेश ने बताया कि तीन कमरे हैं और कक्षा पाँच तक विद्यालय संचालित हैं। ऐसे में दो कक्षाओं के बच्चों को बरामदे में बैठाना हमारी मजबूरी है।
प्राइमरी स्कूल शीशग्रान
प्राइमरी स्कूल शीशग्रान में सिर्फ टिनशेड़ पड़ा हुआ है। कक्षा एक से पांचवीं तक के विद्यार्थी एक ही टिनशेड के नीचे बैठकर पढ़ते हैं। गर्मी में लू के थपेड़े झेलने पड़ते हैं। कई बार बच्चे बीमार हो चुके हैं। इसके बाद भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। बच्चों के परिजन भी अधिकारियों से कक्ष बनवाने की मांग कर चुके हैं। सर्दियां शुरू हो गई हैं तो सर्द हवाएं भी बच्चों को ठिठुरने पर मजबूर करती हैं पूरी सर्दी ठंडी हवाओं के बीच बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। बच्चों को अक्सर बुखार आदि शिकायत होती रहती है।
प्राइमरी स्कूल बरई
प्राइमरी स्कूल दबरई में छात्र संख्या अधिक है। ऐसे में विद्यार्थी बरामदे में बैठते हैं। सर्दी के दिनों में बच्चों की ठंडक का एहसास अधिक होताहै परिसर में अन्य कमरे में हैं, लेकिन उन कमरों का इस्तेमाल पुस्तक रखने और अन्य कामकाजों में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा किया जाता है। कई बच्चे तो ठंड के कारण बीमार भी हो रहे हैं।
इंतजाम कराएंगे
जहां अतिरिक्त कक्ष बन सकते हैं, वहां पर बनवाए जा रहे हैं। हम विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे। बच्चों को सर्दी से बचाने के लिए बेहतर विकल्प का इंतजाम कराएंगे। अंजलि अग्रवाल, बीएसए
