अंबेडकरनगर। शिक्षा सत्र तो नया है, लेकिन परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के हाथों में पुस्तकें पुरानी है। शिक्षक शिक्षिकाएं घर-घर जाकर पुराने बच्चों से पुस्तकें एकत्र कर रहे। इसके बाद उसे विद्यालय में आने वाले छात्र छात्राओं में वितरित कर रहे हैं। कारण यह कि अब तक शासन से परिषदीय विद्यालयों को नई पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं।
नया शिक्षा सत्र प्रारंभ हो चुका है। निजी विद्यालयों के साथ ही परिषदीय विद्यालयों में भी पढ़ाई का कार्य लगभग सुचारू रूप से प्रारंभ हो चुका है। निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले ज्यादातर छात्र छात्राओं के हाथों में नई पुस्तकें पहुंच गई, लेकिन परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को अब तक पुस्तकें ही नहीं नसीब हो सकी है।
यदि किसी को मिली भी है, तो वह पुरानी पुस्तकें हैं कारण यह कि अब तक शासन से जिले को नई पुस्तकें उपलब्ध ही नहीं हो सकी है। बताते चलें कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 1582 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में मौजूदा समय में लगभग 2 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत है। होना तो यह चाहिए था कि शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के साथ ही परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के हाथों में नई पुस्तकें पहुंच जातीं, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका।
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की पढ़ाई में नई पुस्तक का न होना बाधा न बने, इसके लिए तय हुआ है कि बच्चों से पुरानी पुस्तक को एकत्र किया जाए और उसे जब तक नई पुस्तकें नहीं आ जाती, तब तक विद्यालय आने वाले छात्र-छात्राओं को उपलब्ध करा दिया जाए। इसी क्रम में बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि अंतरिम व्यवस्था के तहत बच्चों की पुरानी पुस्तकें एकत्र कराई जाएं उसे विद्यालय में रखें जो छात्र-छात्राएं विद्यालय में आएं, उन्हें यह पुस्तकें उपलब्ध करा दी जाएं। ऐसा इसलिए, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित न हो।
बीएसए के निर्देश के बाद शिक्षक शिक्षिकाएं घर-घर जाकर पुरानी पुस्तकें एकत्र कर रहे हैं। इन पुस्तकों को विद्यालय में आने वाले छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराया जा रहा है। उधर एआरपी डीपी सिंह ने बताया कि जब तक नई पुस्तकें नहीं आतीं, तब तक अंतरिम व्यवस्था के तहत पुरानी पुस्तकों को एकत्र कर उसे नए शिक्षा सत्र में विद्यालय आने वाले छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराया जा रहा है।
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