पेंशन क्या है ? जानिए इस लेख में और क्यों है जरुरी, साथ ही जानिए NPS से क्या क्या है नुकसान?
अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार सरकार या रोजगार देने वाले (नियोक्ता) की तरफ से पेंशन कोई एहसान नहीं है बल्कि यह वेतन का ही हिस्सा है जो कर्मचारी को सेवाकाल के दौरान नहीं दिया गया, इस प्रकार पेंशन आपके वेतन में से काटा गया पैसा है। भारत का सर्वोच्य न्यायालय भी इसी बात को प्रमाणित करता है।
भारत की आजादी के बाद डॉ. भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में संविधान सभा द्वारा सर्वसम्मति से लिखे गये संविधान में भारत को एक लोक कल्याणकारी राज्य कहा गया है। इसका मतलब है कि एक तो बचपन व दूसरा बुढ़ापा इन दोनों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार का कर्तव्य हैं। अपने कर्मचारियों व अन्य नागरिकों को बुढ़ापे में पेंशन देना संविधान की इसी अवधारणा के तहत सरकार का कर्तव्य भी है।
नई पेंशन नीति के क्या-क्यা नुकसान है ?
भारत सरकार के वित मंत्रालय के पत्र संख्या: F. NO. 5/7/2003-ECB& PF दिनांक 22 DEC. 2003 व वर्तमान PFRD Act-2013 Section-20 के अनुसार हमें
1. GPF की सुविधा से वंचित कर दिया गया है।
2. ग्रेच्यूटी के लाभ से वंचित कर दिया गया जो आज के हिसाब से 10 लाख रूपये तक हो सकती है।
3. नई पेंशन योजना के तहत पुरानी स्कीम की तुलना में कटौती चार गुणा से भी ज्यादा है, इससे हमारी तनख्वाह घट गयी है, जिसकी वापसी की भी कोई गारंटी नहीं है।
4. हम अपनी जमा की गई राशि को सेवा मुक्ति से पहले किसी भी अवसर पर नहीं निकाल सकते। (केवल एक या दो बार Critical सलतों को छोड़कर)
5. रिटायरमेंट के समय हम अपनी जमा की गयी राशि (जो कि शेयर मार्केट तय करेगा) का भी केवल 60% पैसा ही निकाल सकते हैं बाकी 40% पैसा हमें शेयर मार्केट में ही लगाना पड़ता रहेगा।
6. किसी कारणवश (दुर्घटनावश ) यदि कोई कर्मचारी अपनी सेवा मुक्ति को उम्र (मौजूदा समय में 60 वर्ष) से एक दिन पहले भी नौकरी छोड़ जाता है या उसकी अकाल मृत्यु हो जाती है तो 80% पैसा पेंशन फंड में रख लिया जायेगा और हमारे परिवारों को केवल 20% पैसा ही मिलेगा।
7.जो कर्मचारी 4-5 साल बाद नौकरी छोड़ चुके हैं, के बारे में सरकार के दिशा- निर्देश कोई स्पष्ट नहीं है। यदि मौत होने की स्थिति में परिवार को केवल 20% पैसा मिलता है तो ऐसे कर्मचारियों को सरकार क्या कल्याणकारी व्यवस्थाएँ देगी ? इसका मतलब यह हुआ कि 60 साल की उम्र तक नौकरी करना आपकी मजबूरी होगी, आप 60 साल की उम्र से पहले मर गये तो केवल 20% जमा राशि हो आपके परिवार को मिलेगी ।
रिटायरमेंट के बाद पेंशन सरकार नहीं बल्कि वह इन्श्योरेंस कम्पनी देगी जिसमें हम जमा राशि का 40% पैसा निवेश करेंगे, पैशन उस पैसे के मासिक ब्याज से भी कम होगी और मूल को तो वो कम्पनी ही खा जायेगी।
9. जब हमारी सरकार ही इस पैसे की कोई गांरटी लेने को तैयार नहीं है और हमारे खून पसीने की गाढ़ी कमाई FDI के माध्यम से विदेशी कॉर्पोरेट घरानों द्वारा लूटनी ही है तो हमारा छत्र क्या होगा? इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
10. अगर यह पैसा मार्केट से बच कर हमें मिल भी गया तो भारी टैक्स की मार
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