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Monday, May 1, 2023

Primary ka master: बीएसए 347 विद्यालयों के शिक्षकों का वेतन पर की यह बड़ी कार्यवाही

 पडरौना। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के डाटा प्रोफ़ाइल को पूरा नहीं करने पर जिले के 347 विद्यालयों के शिक्षकों का वेतन बीएसए ने अगले आदेश तक रोक दिया। बीएसए ने डाटा प्रोफाइल पूरा होने पर ही वेतन भुगतान की बात कही है। इस आदेश के बाद शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने की चिंता बढ़ गई है, तो वहीं शिक्षक संगठनों ने इस आदेश को अव्यावहारिक बताया है।



जिले में 2464 विद्यालय संचालित होते हैं। इसमें करीब तीन लाख विद्यार्थियों का नामांकन है। सत्र 2022-23 में पंजीकृत विद्यार्थियों का प्रोफ़ाइल डाटा प्रत्येक विद्यालयों को यू-डायस प्लस पोर्टल पर 30 अप्रैल तक ऑनलाइन अपलोड करना था। लेकिन अभी तक 347 विद्यालयों में नामांकित विद्यार्थियों का डाटा प्रोफाइल पोर्टल पर अपलोड नहीं है।

इसको गंभीरता से लेते हुए बीएसए डॉ. राम जियावन मौर्या ने इन विद्यालयों में तैनात शिक्षक और शिक्षामित्रों का अप्रैल माह का वेतन संपूर्ण डाटा प्रोफाइल पूरा होने तक रोक दिया है। शिक्षक संगठनों की मानें तो यू-डायस प्लस पोर्टल पर उपलब्ध डाटा कोरोना काल का है। इसमें अधिकतर विद्यार्थी अन्य विद्यालयों में नामांकन करा लिए हैं। विभाग ने उनके लिए प्रत्येक बीआरसी कार्यालय पर आधार बनाने के लिए कर्मचारी रखे हैं। कुछ अभिभावक बच्चों का नामांकन तो कराए, लेकिन बार-बार कहने पर भी अपने पाल्य का आधार नहीं बनवा रहे हैं। कई स्कूलों पर नेटवर्क की समस्या है, तो कहीं के शिक्षक मोबाइल चलाने में पारंगत नहीं हैं। बड़ी बात यह भी है कि विभाग ने पोर्टल पर विद्यार्थियों का डाटा भरने के लिए कोई प्रशिक्षण भी नहीं कराया है।

कोट

विद्यालयों में नामांकित सभी विद्यार्थियों का यू-डायस प्लस पर ऑनलाइन डाटा प्रोफाइल अपलोड करना है। इसके लिए शिक्षकों को कई बार निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद अभी तक जिले के 347 विद्यालयों के शिक्षक लापरवाही करते हुए या तो एक भी बच्चों का डाटा अपलोड नहीं किया गया है या नामांकन के सापेक्ष बहुत कम बच्चों का डॉटा अपलोड है। इसको गंभीरता से लेते हुए यह कार्रवाई की गई है। जिन विद्यालयों का डॉटा अपलोड हो जाएगा वे इसका प्रमाणपत्र दिखाएं। उनका वेतन जारी कर दिया जाएगा।



डॉ. राम जियावन मौर्या, बीएसए, कुशीनगर

347 विद्यालयों का वेतन रोका जाना अव्यावहारिक है। क्योंकि अधिकतर छात्रों के पास आधार कार्ड नहीं है। बीआरसी से बनने वाले कार्ड प्रमाणित जन्मतिथि के अभाव में रिजेक्ट हो जा रहे हैं। केवल शिक्षकों को दोषी मानकर सीधे वेतन रोकने की कार्रवाई अनुचित है। इसके लिए बीआरसी पर कार्यरत कर्मचारी, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

-अविनाश शुक्ला, अध्यक्ष, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, कुशीनगर।

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