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Tuesday, June 20, 2023

कल तक स्वस्थ थे शिक्षक, स्थानांतरण के लिए बन गए बीमार

 कल तक स्वस्थ थे शिक्षक, स्थानांतरण के लिए बन गए बीमार


सिद्धार्थनगर, निज संवाददाता 

बेसिक शिक्षा विभाग में कल तक स्वस्थ रहने वाले शिक्षक स्थानांतरण के लिए बीमारी से ग्रसित हो गए हैं। 140 शिक्षक पति-पत्नी व अविवाहित बेटे-बेटियों को गंभीर असाध्य रोग से पीड़ित बताया है। वहीं कुछ शिक्षिकाओं ने स्थानांतरण के लिए पति को दिव्यांग बता दिया है। इसका लोगों ने प्रमाणपत्र भी लगाया है। चर्चा है कि यह प्रमाणपत्र बाबुओं की सेटिंग से बना है। वहीं बीमारी व दिव्यागंता सही है या गलत इसकी पोल 20 जून को मेडिकल बोर्ड के सामने खुलेगी।


दरअसल, शैक्षिक सत्र 2023- 24 के लिए बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं का अंतरजनपदीय स्थानांतरण होना है। इस स्थानांतरण के लिए नीति निर्धारित है। इसमें असाध्य गंभीर रोगी, दिव्यांगजनों को वरीयता मिलेगा। इसके अलावा भारांक का भी लाभ दिया जाएगा। इसे देखते हुए स्थानांतरण के लिए कल तक स्वस्थ रहने वाले शिक्षकों ने खुद को या पत्नी को व अविवाहित पुत्र-पुत्रियों को गंभीर असाध्य रोग से पीड़ित बताया है। विभाग के 142 शिक्षक व शिक्षिकाओं ने बीमारी का प्रमाणपत्र लगाकर आवेदन भी किया है। वहीं 63 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने खुद को, पति-पत्नी व अविवाहित बेटे-बेटियों को दिव्यांग बताकर स्थानांतरण के लिए प्रमाणपत्र लगाया है। विभागीय लोगों ने बताया कि दिव्यांग प्रमाणपत्र के लिए लोगों ने गठिया बीमारी, मार्ग दुर्घटना में घायल होने का लाभ लिया है, जबकि शरीर के 40 प्रतिशत अंग के काम न करने पर ही दिव्यांगता मानी जा सकती है।


राज्यपाल राष्ट्रपति पुरस्कृत प्रमाणपत्र में खेल: राज्यपाल व राष्ट्रपति से पुरस्कृत शिक्षक को स्थानांतरण में भारांक का लाभ दिया जाएगा। राज्यपाल से सीधे पुरस्कृत होने पर तीन व राष्ट्रपति से सीधे पुरस्कृत होने पर पांच अंक के भारांक का लाभ मिलना है, लेकिन कई लोगों ने एनजीओ के माध्यम से राज्यपाल व राष्ट्रपति का हस्ताक्षर युक्त प्रमाणपत्र लगाकर स्थानांतरण की फिराक में लगे हैं जबकि राज्यपाल व राष्ट्रपति से सीधे पुरस्कृत न होने पर प्रमाणपत्र स्थानांतरण में मान्य नहीं है।


मरीज के भर्ती होने का ले सकते हैं सहारा: 20 जून को मेडिकल टीम असाध्य गंभीर बीमारियों व दिव्यांगजनों के प्रमाणपत्रों का वेरीफिकेशन करते हुए बीमारी की जांच करेगी। इस दरमियान पति-पत्नी या अविवाहित बेटे-बेटियों के प्रमाणपत्र को दिखाने के बाद शिक्षक मरीज को भर्ती कराने की बात कहकर भारांक का लाभ उठा सकते हैं जबकि हकीकत मरीज को देखने के बाद ही पता चल सकेगा।

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