एनसीएफ : स्कूलों में हफ्ते में पांच से साढ़े पांच घंटे तक होगी पढ़ाई
नई दिल्ली। स्कूलों में हफ्ते में पांच दिन और दिन में पांच से साढ़े पांच घंटे तक पढ़ाई कराने की सिफारिश की गई है। राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा (एनसीएफ) 2023 में स्कूलों को अपनी जरूरत के हिसाब से शैक्षणिक सत्र बनाने और उसमें स्थानीय त्योहार, समुदाय और मौसम के आधार पर बदलाव करने की अनुमति देने का भी प्रस्ताव किया गया है। शनिवार का दिन खेल और अतिरिक्त गतिविधियों के माध्यम से ज्ञान देने के लिए होगा।
स्कूल फाउंडेशन स्टेज (3 से 8 आयु वर्ग), प्रोप्रेटरी (8 से 11), मीडिल (11 से 14), सेकेंडरी ( 14 से 18 आयु वर्ग) के आधार पर शैक्षणिक सत्र बना सकेंगे।
दाखिले, परीक्षा और त्योहारों के समायोजन के लिए इसमें बदलाव भी कर सकेंगे। शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 समिति के अध्यक्ष और इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के कस्तुरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की ओर से तैयार एनसीएफ को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को सौंप दी है। एनसीईआरटी ने इसके आधार पर पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें तैयार करने के लिए समितियां गठित कर दी हैं। इसका मकसद शैक्षणिक सत्र 2024-25 से ही सभी स्कूलों में बदली व्यवस्था लागू करना है।
कोचिंग के बजाय स्कूल में अतिरिक्त कक्षा लगेंगी : एनसीएफ में बच्चों की कोचिंग पर निर्भरता कम करने के लिए स्कूलों में ही अतिरिक्त कक्षाएं चलाने की सिफारिश की गई है। बच्चों के स्कूली प्रदर्शन में गिरावट आने पर शिक्षकों और अभिभावकों को मिलकर उसके कारण तलाशने होंगे। इसके लिए निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में भी शिक्षक- अभिभावक बैठक का प्रावधान करने को कहा गया है। इसमें बच्चे की पढ़ाई, एक्स्ट्रा एक्टिविटी समेत अन्य पर बातों पर चर्चा की जाए, ताकि कमियों में सुधार किया जा सके।
साल में 180 दिन और हफ्ते में 29 घंटे पढ़ाई
स्कूलों में एक शैक्षणिक सत्र में कुल 220 कामकाजी दिन होंगे, जोकि राष्ट्रीय अवकाश, आवधिक छुट्टी आदि के बाद तय किए जाएंगे। हालांकि इसमें से नियमित विषयों की पढ़ाई के कुल 180 दिन ही रहेंगे। इन 220 दिनों में से 20 दिन मूल्यांकन व इससे जुड़ी गतिविधियों और 20 अन्य दिन स्कूल से जुड़े कार्यक्रमों व अन्य गतिविधियों के लिए निर्धारित किए जा सकते हैं हफ्ते में कुल 29 घंटे कक्षा लगाने का प्रस्ताव है।
महीने में 10 दिन बैग से मुक्ति
एनईपी 2020 की स्कूल बैग पॉलिसी के आधार पर महीने में 10 दिन बिना बैग से स्कूल आने वाली योजना भी शामिल होगी। इसके अलावा स्कूल असेंबली में भी बदलाव का सुझाव है। शनिवार को असेंबली की बजाय सामान्य खेल या कोई अन्य गतिविधि भी करवायी जा सकती है। इसमें संगीत, रंगमंच, कला, साहित्य, खेल शामिल किए जा सकते हैं। सीखने की प्रक्रिया में निरंतर सुधार करना होगा, लेकिन छात्रों को प्रेशर बनाए बिना। इसके अलावा स्थानीय समुदायों, स्थानीय कलाकारों, कारीगरों के साथ छात्र विभिन्न कलाएं सीख सकते हैं। वहीं, इस दौरान काउंसलर के माध्यम से छात्रों को इस उम्र में आने वाले बदलावों समेत अन्य दिक्कतों पर समाधान का सत्र भी आयोजित हो सकते हैं।

