सूरते हाल :👉 'शिक्षिका' लखनऊ में तब भी बीएसए ऑफिस में लग रही हाजिरी, बीएसए ऑफिस से ही पड़ती है गैर हाजिरी की आदत
रायबरेली। अभी हाल ही में बेसिक शिक्षा विभाग में गैर जनपद से स्थानांतरित होकर जिले में आई सुनीता (काल्पनिक नाम) की चाहत लखनऊ थी, लेकिन राजधानी में सीटों की संख्या कम होने के कारण उनको लखनऊ नहीं मिल सका। उन्हें दूसरे नंबर का जनपद रायबरेली मिल गया है। अब उन्होंने जिले में अपने कागजात जमा करके अपनी आमद दर्ज करा दी है और पिछले एक महीने से नौकरी का सुख लखनऊ में रहकर ही प्राप्त कर रहीं हैं। लखनऊ में अपने परिवार के बीच में हैं और रायबरेली जिला मुख्यालय पर उनकी उपस्थिति दर्ज हो रही है। यह तो सिर्फ एक सुनीता हैं, ऐसी न जाने कितनी सुनीता है जो कि इस बार गैर जनपद से स्थानांतरण होकर रायबरेली जिले में आई और लखनऊ में ही रह रही हैं। लखनऊ में रहकर वह पिछले
एक महीने से सरकारी नौकरी का पूरा सुख भोग रही हैं। उन्हें विद्यालय भले ही अभी न मिले हो, लेकिन उनकी हाजिरी जिला मुख्यालय पर दर्ज हो रही है। जिला मुख्यालय पर पिछले एक महीने से उनकी उपस्थिति दर्ज हो रही है। अब सुनीता जैसी दर्जनों शिक्षकों की यही चाहत है कि बेसिक शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद छह महीने तक विद्यालय आवंटन का आदेश न जारी करें और जिला मुख्यालय के बाबूओं की कृपा से उनकी नौकरी चलती रहेगी। जिला मुख्यालय पर 15 दिन में एक बार उनकी आमद दर्ज हो जाएगी और पूरे महीने की नौकरी उनकी चलती रहेगी। जी हां..। गैर जनपदों से स्थानांतरित होकर आए 233 शिक्षकों की इस समय जिला मुख्यालय पर ही हाजिरी लग रही है। इसमें से बहुत से शिक्षक ऐसे हैं जो कि गैर जनपदों के भी निवासी, उन्हें अपना गृह जनपद नहीं मिला है तो उन्होंने रायबरेली में ही अपना ट्रांसपर ले लिया है। अब यहां पर पिछले एक महीने से इन लोगों की हाजिरी जिला मुख्यालय पर ही लग रही है। इसमें बहुत से शिक्षक ऐसे हैं जिनका इस समय कर्तव्यबोध पूरी तरह से डगमगा गया है। वर्षों घरों से दूर रहने के बाद जब जिले में आने का अवसर मिला तो इसके बाद भी वह लोग नियमित तौर पर जिला मुख्यालय पर उपस्थिति नहीं हो रहे हैं। वहीं, कुछ इसमें ऐसे शिक्षक शामिल है जो कि प्रतिदिन - आ रहे हैं, लेकिन अगर उन्हें इमरजेंसी में एक दिन की छुट्टी चाहिए तो विभाग के बाबू ही उन्हें कर्तव्यबोध का ज्ञान कराने लगते हैं।
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