प्रयोग का केंद्र बने स्कूल, उपहास से अवसाद में शिक्षक
महराजगंज (एसएनबी)। 5 सितम्बर को गुरु को भगवान की संज्ञा और उसके बाद उपहास का साधन बनाए जाने से शिक्षक तनाव से गुजर रहे है। विभाग के प्रतिदिन नये-नये आदेशों से स्कूल एक्सपेरिमेंट का केन्द्र बन गया है और कार्यवाहियों से उपहास के साधन बन गये है। विभाग के हास्यास्पद आदेश का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि बच्चों के ड्रेस, बैग, जूता आदि का धन अभिभावकों के खाते में भेजा जा रहा है और उस धन से सामानों की खरीदारी का प्रमाण पोर्टल पर शिक्षकों को दर्ज करने के साथ संसाधनों के साथ स्कूलों पर बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का जिम्मा शिक्षकों पर थोपा गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षकों व संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। सरकार व विभाग ग्रामीण परिवेश में स्थानीय समस्याएं भी बच्चों की उपस्थिति में दिक्कतें पैदा कर रही हैं। इसके बावजूद बच्चों को स्कूल न भेजने पर अभिभावकों की जिम्मेदारी तय न कर शिक्षकों पर चाबुक चल रहा है। कम्प्यूटर व इंटरनेट ड्रेस
की ट्रेनिंग के बगैर डीबीटी, फोटो अपलोड, आधार फीडिंग, नांमाकन परिवार सर्वेक्षण आनलाइन फीडिंग आदि कार्य लिपिक के तौर पर लिया जा रहा है। निपुण लक्ष्य एफएलएन व निर्धारित कोर्स एक साथ चलाकर शिक्षकों व बच्चों को मानसिक बोझ तले दबाया जा रहा है। प्रमोशन मुचुअल ट्रासफर में उलझे शिक्षकों से निर्वाचन मध्याहन भोजन, परिवार सर्वेक्षण, पल्स पोलियो, स्वास्थ्य विभाग की ड्यूटी से मानसिक तनाव बढ़ रहा है। वर्षभर सघन निरीक्षण के नाम पर शिक्षकों को समाज में संदेहास्पद बनाया जा रहा है। जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण अभिभावक छात्रों का नामांकन कराने से कतरा रहे है। अंतर्जनपदीय तबादले से पिछड़े जनपद में बड़ी संख्या में स्कूल शिक्षामित्रों के भरोसे तो तमाम एकल हो गये है। निपुण लक्ष्य के दवाब में कई कक्षाओं का भार ढो रहे है। विभिन्न सूचनाओं के लिपिकीय कार्य से शिक्षक कार्य बाधित हो रहा है। नहीं जाना पक्ष, तनाव में
निलम्बित शिक्षक: परिषदीय स्कूलों के अजीबोगरीब आदेश से शिक्षक हलकान और परेशान तो थे ही अब स्थानीय स्तर पर बगैर पक्ष लिए निलम्बन से मानसिक तनाव झेल रहे हैं। जनपद में माह अगस्त के असेस्मेंट के आधार पर न्यून छात्र उपस्थिति पर 23 शिक्षकों को निलम्बित कर दिया गया। अगस्त माह में सपोर्टिंग सुपरविजन के डाटा फिडिंग में निरीक्षणकर्ता द्वारा त्रुटि भी की गयी बावजूद इसके शिक्षकों का पक्ष लिए बिना निलम्बन कर दिया गया। सुपरविजनकर्ता द्वारा डाटा फिडिंग में त्रुटि पर बाद मे पांच एआरपी से सिर्फ स्पष्टीकरण मांगा गया लेकिन शिक्षकों को निलम्बित कर सामाजिक उपहास का पात्र बना दिया गया। इसी तरह सिसवा क्षेत्र के बरवां विद्यापति मे बच्चे गांव में गाजे-बाजे के साथ रैली में शामिल रहे और 1.40 बजे बीएसए ने बिना पक्ष लिए शिक्षकों का वेतन अवरुद्ध कर दिया। आए दिन मनमाने कार्रवाई से शिक्षक अवसाद में हैय और शिक्षकों की गरिमा धूमिल करने से आक्रोशित है।

