दो डीआइओएस ने नहीं किया था समायोजन प्रक्रिया का अनुपालन
प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक भर्ती (टीजीटी) 2013 में फर्जी चयन और समायोजन कराने वालों ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के समानांतर प्रक्रिया अपनाई थी। जिन 12 लोगों को फर्जी ढंग से चयनित दिखाया था, उनके फर्जी समायोजन पत्र संभल और बलरामपुर के डीआइओएस को अलग-अलग तिथियों में जारी किए थे। दोनों डीआइओएस ने कार्यभार ग्रहण कराने के पहले नियमानुसार चयन बोर्ड की वेबसाइट से या चयन बोर्ड से सत्यापन कराया होता तो फर्जीवाड़ा पकड़ लिया गया होता।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने यह भर्ती वर्ष 2017 में पूरी कर ली थी। भर्ती में सुप्रीम कोर्ट के सात अगस्त 2018 के आदेश के क्रम में चयन बोर्ड ने सात अक्टूबर 2018 को करीब 550 अभ्यर्थियों का समायोजन कर दिया था। षडयंत्रकारियों ने इसी में फर्जी समायोजन पत्र बनाया, छह अभ्यर्थियों ने बलरामपुर के विद्यालयों में तथा एक अभ्यर्थी ने संभल में कार्यभार ग्रहण कर लिया, संभल में भी फर्जी ढंग से छह का समायोजन पत्र भेजा गया था।
फर्जी चयन की शिकायत पर संभल के डीआइओएस ने चार अप्रैल 2023 को चयन बोर्ड को सत्यापन के लिए पत्र भेजा। लिखा कि 25 मार्च 2021, 25 जून 2021, 16 अगस्त 2021 के दो व 16 अक्टूबर 2021 को जारी दो-दो पत्र में चयन बोर्ड की ओर से कुल छह अभ्यर्थियों दीपिका सिंह, मृत्युंजय यादव, अमित कुमार श्रीवास्तव, संजय कुमार दुबे, पंकज यादव और ऋतु जैसवार का समायोजन किया गया है।
बलरामपुर के डीआइओएस ने चयन बोर्ड को लिखा कि 15 मार्च 2022 को शिल्पी केशरी, 11 अप्रैल 2022 को कल्पना मौर्या, 25 अक्टूबर 2021 को जितेंद्र कुमार, 15 दिसंबर 2021 को मितेश कुमार यादव, 15 मार्च 2022 को संतोष कुमार चंद्र व राजकुमार दुबे के समायोजन का पत्र चयन बोर्ड की और से मिला है। सत्यापन करा चयन बोर्ड ने डीआइओएस को लिखा कि यह समायोजन पत्र चयन बोर्ड ने नहीं जारी किए हैं।

