अमृत विचार : बेसिक शिक्षा परिषद
की ओर से संचालित प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में शिक्षकों की दी गई शिक्षक डायरी का मकसद ही अपने उद्देश्य से भटक गया है।
शिक्षक एक-दूसरे की डायरी को ग्रुपों में वायरल कर रहे हैं और उसी से अन्य शिक्षक भी नकल करके अपनी डायरी बना रहे हैं। जबकि इस डायरी में शिक्षकों को पढ़ाने का तौर-तरीका, लेसन प्लान और पढ़ाने के लिए किए जा रहे नवाचार को रोजाना दर्ज करना था। वाट्सएप पर वायरल शिक्षक डायरी का संज्ञान विभाग ने भी लिया है। अधिकारियों को निरीक्षण में शिक्षकों की शिक्षक डायरी अनिवार्य रूप से देखने के निर्देश भी दिए गए हैं। निरीक्षण में एक जैसी डायरी पाए जाने पर शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई भी की जायेगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि शिक्षकों को डायरी विभाग की ओर से दी गई है। लेकिन जब एक शिक्षक इस डायरी में अपने प्लान लिखना शुरू कर देते है तो ये विद्यालय और उस शिक्षक से जुड़ा एक दस्तावेज हो जाता है। यदि शिक्षक वायरल डायरी को देखकर अपनी डायरी तैयार कर लेते हैं तो ये गलत है।
इस तरह से होगी जांच : शिक्षक डायरी का अवलोकन इस प्रकार से होगा कि उसमें जो लेसन प्लान कक्षावार दर्ज होगा। उसी के आधार पर बच्चों से सवाल किए जायेंगे। यदि 70 से 80 फीसदी बच्चे लेसन प्लान के अनुसार जवाब दे पायेंगे तो ठीक है नहीं तो इसके लिए शिक्षकों को जिम्मेदार माना जायेगा।
डायरी का ये है उद्देश्य
स्कूलों में शिक्षक डायरी वितरित किए जाने का एक खास उद्देश्य था। अधिकारियों ने बताया कि इस डायरी में पढ़ाई को लेकर अपने-अपने प्लान नियमित लिखने होते हैं। जैसे किस दिन किस कक्षा को क्या पढ़ाना है, बच्चे को किस ढंग से पढ़ाये कि उसको समझ में आए। दरअसल, विभाग का उद्देश्य था कि अब सरकारी विद्यालयों में भी प्राइवेट स्कूलों की ही तर्ज पर व्यवस्था लागू हो सके। ताकि विद्यालय में बच्चों की नामांकन संख्या भी बढ़ें और अभिभावकों का विश्वास भी।

