नौतपा के शुरू होते ही बुंदेलखंड सूर्य की गर्मी से झुलस रहा है।
पिछले तीन-चार दिनों से एक के बाद एक गर्मी के रिकॉर्ड टूट रहे हैं। कल। सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए प्रदेश ही नहीं बल्कि विश्व में 7वें स्थान पर रहने वाला शहर झांसी था। इस सबके बावजूद 49 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय अपने परिसर व उसके अधीन महाविद्यालयों में परीक्षाएं आयोजित करा रहा है। वह भी तीन पालियों में। इसको लेकर शिक्षक विधायक डॉ बाबूलाल तिवारी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं की परीक्षाएं गर्मियों में कराकर आखिर कुलपति कौन सा पदक हासिल करना चाहते हैं ? क्या छात्रों की हत्या का पदक उन्हें शोभायमान करेगा?
गौरतलाप है कि 25 मई से नौतपा शुरू हुए और इसी के साथ गर्मी का कहर भी इसी तेजी के साथ शुरू हुआ। जैसे-जैसे नौतपा के दिनों की संख्या बड़ी गर्मी का तापमान भी वैसे ही वैसे बढ़ता चला गया। बीते रोज अब तक के सारे रिकॉर्ड्स ध्वस्त करते हुए तापमान अपने चरम पर था। 49 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ झांसी को विश्व के 7वें नंबर के शहर के रूप में रखा गया था। इसके बावजूद भी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में सुबह 7 से 9, 10.30 से 12.30 और दोपहर 2 से 4 बजे तक तीन पारियों में परीक्षाएं आयोजित की जा रही है। इन परीक्षाओं में छात्र-छात्राओं को कई बार चक्कर आना शुरू हो जाते हैं। तो बैठे ही बैठे कई छात्र-छात्राएं बेहोश भी हुए हैं।
बावजूद इसके वातानुकूलित कमरों में बैठा विश्वविद्यालय प्रशासन और स्वयं कुलपति के माथे पर शिकन तक नहीं आई है। क्योंकि उन्हें इस गर्मी का एहसास ही नहीं है। जो 49 डिग्री सेल्सियस पर दोपहर के समय छात्र-छात्राएं भुगतते हैं। इन सारी स्थितियों को देखते हुए शिक्षक विधायक डॉ. बाबूलाल तिवारी के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने कहा कि यह बुंदेलखंड की धरा है यहां पर जितनी तेजी के साथ सर्दी होती है उतनी तेजी के साथ ही गर्मी भी होती है। इस बार गर्मी ने अपने सारे रिकॉर्ड्स तोड़ दिए लेकिन कुलपति आखिर कौन सा पदक जीतना चाहते और इतना क्या आवश्यक है कि भीषण गर्मी के दौरान भी परीक्षाएं आयोजित कराई जाए। उन्होंने कहा कि मैं तो इस पक्ष में हूं कि प्राइमरी से लेकर के उच्च शिक्षा तक सारे छात्र- छात्राओं की परीक्षाएं व विद्यालय स्थगित करते हुए यह सारी परीक्षाएं जून के बाद आयोजित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि अपने शैक्षणिक कैलेंडर को कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन दुरुस्त रखना चाहता है तो उन्हें शुरू से ही इस पर अमल करना चाहिए नाकि छात्रों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करके अपनी औपचारिकता पूरी करें।
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