Primary Ka Master Latest Updates👇

Sunday, June 2, 2024

मृत्यु से पहले दिया बयान दोष सिद्धि का आधारः कोर्ट

 नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालत को विश्वास दिला सकने वाले मृत्यु-पूर्व प्रामाणिक बयान पर भरोसा किया जा सकता है। यह बिना किसी पुष्टि के किसी आरोपी को दोषी ठहराने का एकमात्र आधार हो सकता है।



महाराष्ट्र के बीड जिले में 22 साल पहले पुलिस कांस्टेबल पत्नी की हत्या के मामले में एक पूर्व सैन्यकर्मी की सजा बरकरार रखते हुए शीर्ष अदालत ने 15 मई को यह टिप्पणी की। अदालत को मृत्यु-पूर्व बयान की सावधानीपूर्वक पड़ताल करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि यह सुसंगत एवं विश्वसनीय हो तथा किसी के सिखाने


पर न दिया गया हो। इसने कहा कि ह्यजब मृत्यु-पूर्व दिया गया बयान प्रामाणिक और अदालत को विश्वास दिला सकने वाला हो तो उस पर भरोसा किया जा सकता है तथा यह बिना किसी पुष्टि के दोषसिद्धि का एकमात्र आधार हो सकता है। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि हालांकि इस तरह के मृत्यु-पूर्व बयान को स्वीकार करने से पहले अदालत को संतुष्ट होना चाहिए कि यह स्वेच्छा से दिया गया है।


महिला के साथ क्रूरता हुई थी : इस मामले में अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि महिला के साथ उसके पति और ससुराल के अन्य लोगों ने क्रूरता की थी। उसके साथ मारपीट की गई तथा उसके हाथ-पैर बांध दिए गए और मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी गई

मृत्यु से पहले दिया बयान दोष सिद्धि का आधारः कोर्ट Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Updatemarts

Social media link