रास्ते क्रिटिकल, हाजरी डिजिटलः एसी कमरों से विद्यालयों के दुर्गम रास्ते नही दिखाई देते!
एक तरफ प्राकृतिक आपदा व बरसाती पानी ने अपना कोप दिखाना शुरू कर दिया है तो दूसरी तरफ बेसिक शिक्षा को डीजी कंचन वर्मा भी शिक्षकों के दमन्चक्र को बेखोफ होकर चला रही है। प्रकृति के प्रहार से शिक्षक म बामुश्किल अपनी जान बचा रहे हैं। दुर्गम रास्ते, कच्चे रास्तों पर फिसलन, टूटे पड़े पेड़, घुटनों तक इबी सड़के व विद्यालयों को देखकर हर कोई कह रहा है" रास्ते है क्रिटिकल, हाजरी है डिजिटल " यह कैसे संभव है। डीजी साहिबा अपने पूर्व वर्ति के नक्शे कदम पर चलते हुए शिक्षकों पर डिजिटल का बोझ डालने पर पर अडिग है। मैं समझता हूँ कि उनकी आंखें खोल देने के लिए यह खबर ही काफी है- " काम के बोझ के मारे रोबोट ने की आत्महत्या" यह घटना वास्तविक है। दक्षिण कोरिया में एक रोबोट सरकारी दफ्तर में काम करता था। वह हर दिन सुबह 9 बजे से सांय चार बजे तक काम करता था। मुनी सिटी काउंसिल के कार्यालय • में कार्यरत इस रोबोट ने काम के बोझ के कारण सोड़ियों के ऊपर से नीचे छलांग लगा दी और चंद मशीनी टुकड़ों में बदल गया। उसने काम करना बंद कर दिया।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश संयुक्त मंत्री एवं सिद्धार्थनगर के जिलाध्यक्ष आदित्य कुमार की शुक्ला कहते हैं कि भारी बारिश से तमाम परिषदीय विद्यालयों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। पानी से सड़कें खराब हो चुकी हैं। तमाम विद्यालय भवन काफी पुराने हैं जो लगातार बारिश से पूरी तरह से भीगकर दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। सिद्धार्थनगर सीमावतों एवं वाढ प्रभावित् जनपद है यहाँ प्रतिवर्ष बरसात के मौसम में ऐसी स्थिति हो जाती है। प्रशासन समय से संज्ञान लेकर सुरक्षा मानक तय करते हुए बच्चों एवं शिक्षकों को सुरक्षा का ख्याल रखते हुए विद्यालयों में। विषम स्थिति बने रहने तक अवकाश घोषित करें। उनका कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ बड़े पदों पर आसीन अधिकारी, जिन्हें जमीनी हकीकत का कोई अंदाजा नहीं है। चे वातानुकूलित कक्ष में बैठकर अव्यावहारिक आदेश जारी करते रहते हैं। उन्ही में से एक आदेश डिजिटल हाजरी का है। उन्हें भी ऐसी विषम स्थितियों का संज्ञान लेना चाहिए तथा इस मौसम में विद्यालय का भौतिक निरीक्षण कर धरातल से जुड़ कर अनुभव प्राप्त करते हुए ऑनलाइन हाजिरी जैसे अनावश्यक अपमानजनक उत्पीड़न वाले आदेश को तत्काल वापस लेना चाहिए।

