असमंजस में सेवाएं दे रहे 32 एआरपी पर लटकी तलवार, शासन ने सुना दिया फिर से चयन करने का फरमान
झाँसी : सरकारी स्कूलों में विषय
विशेषज्ञ के तौर पर तैनात किए गए 32 एआरपी (अकैडमिक रिसोर्स पर्सन) पर अब तलवार लटक गई है। शासन ने नए सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू करने आदेश दिया है। पर, इससे असमंजस की स्थिति भी बन गई है, क्योकि अब तक कार्यरत एआरपी का कार्यकाल 31 मार्च को समाप्त हो चुका है और उनका मानदेय भी बन्द हो गया है। अब नए सिरे से तैनाती होने पर 4 माह के वेतन को लेकर पेंच फैंस
सकता है। प्रदेश के 821 ब्लॉक में हिन्दी, गणित, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान एवं विज्ञान विषय के विशेषज्ञ के रूप में नियमित शिक्षकों में से प्रत्येक ब्लॉक पर 5-5 एआरपी वर्ष 2019 में 2 वर्ष के लिए रखे गए थे। कार्य सन्तोषजनक होने पर एक-एक वर्ष करके अधिकतम दो बार कार्यकाल बढ़ाने का प्राविधान किया गया था। वर्ष दिसम्बर 2023 में इनका कार्यकाल समाप्त होने पर निपुण लक्ष्य प्राप्ति को ध्यान में रखते हुए
इनका कार्यकाल 31 मार्च 2024 तक के लिए विस्तारित कर दिया गया था। प्रत्येक एआरपी को अपने ब्लॉक में 10-10 विद्यालयों को गोद लेकर निपुण बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसमें अधिकांश एआरपी अपने गोद लिए विद्यालयों को निपुण बनाने में फिसड्डी साबित हुए। इससे ही शासन की नजरें इन पर तिरछी हो गईं। इनका कार्यकाल मार्च में समाप्त होने के बाद सेवा विस्तारित करने सम्बन्धी कोई शासनादेश जारी नहीं
किया गया। इधर, यह एआरपी काम करते रहे, लेकिन इनका मानदेय रोक दिया गया। जनपद में 32 एआरपी वर्तमान में कार्यरत है। इनको मार्च तक प्रतिमाह 3 हजार रुपये मानदेय दिया गया। इसके बाद 4 माह से इनके मानदेय पर रोक लगा दी गई। यह एआरपी कार्यकाल बढ़ाए जाने की आस में बिना मानदेय के ही काम करते रहे, लेकिन अब शासन ने नए सिरे से एआरपी का चयन करने के आदेश दिए हैं, जिससे जनपद में काम कर रहे सभी एआरपी की सेवाओं पर
तलवार लटक गई है।


