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Sunday, January 5, 2025

यूजीसी नेट, पीएचडी बिना भी विश्वविद्यालयों में बन सकेंगे शिक्षक

 नई दिल्ली। देश के विश्वविद्यालयों में अब तीन तरह के शिक्षक सेवाएं देंगे। इनमें दो तरह के नियमित और एक तरह के अस्थायी शिक्षक होंगे। अस्थायी शिक्षक का कार्यकाल 3 वर्ष होगा। नियमित शिक्षकों में यूजीसी नेट परीक्षा करने वालों के साथ ही विशेषज्ञ स्नातक शामिल होंगे, जिनके लिए यूजीसी नेट या पीएचडी की अनिवार्यता नहीं होगी। नई शिक्षा नीति के अनुरूप विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) नियमों में बदलाव कर रहा है जो अगले शैक्षिक वर्ष से लागू होंगे।


केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शिक्षक नियमों में बदलाव पर आधारित यूजीसी निमयन 2025 को जारी करेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उच्च शिक्षा में पढ़ने, पढ़ाने के नियमों में बदलाव के आधार पर इन नियमों को तैयार किया गया है। एनईपी में छात्रों के लिए उच्च गुणवत्ता युक्त शिक्षा, समानता, उपलब्धता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। इसी के तहत अगले 20 से 40 सालों में रोजगार की बदलती मांग के आधार पर छात्रों को तैयार करना है।


छात्रों को स्नातक में एक साथ दो डिग्री की पढ़ाई करने की अनुमति होगी। कौशल आधारित कोर्स जुड़ रहे हैं। प्रोजेक्ट और फील्ड वर्क, इंटर्नशिप पर फोकस होगा.




छात्र एक विषय की पढ़ाई के साथ किसी अन्य विषय में इंटर्नशिप कर सकेंगे। उदाहरण के लिए, अर्थशास्त्र की पढ़ाई करने वाले छात्र इंटर्नशिप के लिए हॉस्पिटल को भी चुन सकते हैं। इसमें मरीजों की देखभाल और प्रबंधन का विषय शामिल होगा।




इस तरह से बनेंगे शिक्षक


विश्वविद्यालयों में अब शिक्षक बनने के लिए एक ही विषय में यूजी, पीजी व पीएचडी की बाध्यता नहीं होगी। पीएचडी की डिग्री अस्सिटेंट प्रोफेसर से एसोसिएट व प्रोफेसर की पदोन्नति के लिए जरूरी होगी। योग, ड्रामा, फाइन आर्ट्स आदि क्षेत्रों में महारत हासिल स्नातक भी अस्सिटेंट प्रोफेसर बन सकेंगे। इनके लिए यूजीसी नेट या पीएचडी की डिग्री जरूरी नहीं होगी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर का अवार्ड जरूरी होगा। विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी विश्वविद्यालयों में 3 वर्ष तक शिक्षक बनकर सेवाएं दे सकेंगे।




नए नियमों में छात्रों की सुविधाओं पर ध्यान


नए नियमों में हर तरह के छात्रों की सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है, ताकि वे पढ़ाई को बोझ न समझें। जिन छात्रों को सीखने और समझने की क्षमता कम है उन्हें अपनी सुविधा और पसंद से देरी से डिग्री हासिल करने की छूट होगी, वहीं तेजी से सीखने और समझने वाले 10 फीसदी छात्रों को डिग्री की पढ़ाई जल्द

 पूरी करने की अनुमति होगी।


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