एटा। आर्थिक तंगी व बच्चों में टुकड़ों में मिली रोटी से दुखी मां ने सोमवार को कीटनाशक खाकर जान दे दी। घटना कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव नगला पवल की है। मृतका 'की पहचान सुमन (35) के रूप में हुई है। पति की मौत के बाद सुमन पर छह बच्चों व सास को जिम्मेदारी थी।
बच्चे जब स्कूल जाते थे तो मध्याह्न भोजन से पेट भर जाता था लेकिन रविवार को स्कूल बंद होने पर बच्चे भूखे ही रह गए। घर में जितना आटा था, उससे कुल 6 रोटियां बनीं। संभी 8 सदस्यों में ये रोटियां टुकड़ों में बंटी तो मां का कलेजा भर आया।
यहीं से उसके जीने की चाह खत्म हो गई। शव के अंतिम संस्कार तक के पैसे परिवार के पास नहीं थे। आसपास के लोगों और रिश्तेदारों की मदद से मंगलवार को अंतिम क्रया पूरी की जा सकी नगला पवल निवासी रामबेटी ने बताया कि उसके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा ओमप्रकाश परिवार समेत दिल्ली में रहकर नौकरी करता है। दूसरा बेटा ओमकार उर्फ बबलू गांव में रहकर खेतों में मजदूरी करता था। दो वर्ष पूर्व उसकी बीमारी से मौत हो गई। जिसके बाद ओमकार की पत्नी सुमन 6 बच्चों व उसका पालन पोषण कर रही थी। सुमन की चार
बेटियां व दो लड़के हैं। रामबेटी ने बताया कि पति की मौत क सुमन (35) काफी परेशान रहने लगी थी। घर पर काम करने के बाद दूसरों के खेतों पर मजदूरी कर बच्चों को पालती थी। 6 बच्चों में सबसे बड़ी बेटी छाया ने बताया कि पापा की मौत बाद घर का मुजारा करना मुश्किल हो रहा था। हम लोगों के खाने के लिए पर्याप्त भोजन तक नहीं मिल पा रहा था। जिसकी बजह से मां मानसिक रूप से परेशान रहती थी। मेरे साथ हो छोटी बहने मोहिनी, सुधा, संतोषी और भाई कन्हैया सरकारी विद्यालय में पढ़ने जाते हैं। छोटा भाई विवेक घर पर रहता है छागा ने बताया कि रविवार होने के कारण हम लोग स्कूल नहीं गाए थे ती दिन में खाना नहीं मिला। सुबह के नाश्ते के बाद शाम को घर पर मुट्ठीभर आटा था जिससे रोटिया बन पाई। खाने वाले लोग 8 थे टुकड़ों में रोटी बांटी गई। रामबेटों के बताया कि उनके पास अपना मकान तो है लेकिन क्षेत्तो के लिए एक बोमा से भी कम जमीन हैं, जिससे गुजारा नाहीं होता था।
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