गुरु जी बने लापरवाह, स्कूल की जिम्मेदारी उठा रहे नौनिहाल
प्रतापगढ़। परिषदीय स्कूलों की दशा में सुधार की जगह दिन प्रतिदिन बिगड़ती ही जा रही है। स्कूल की जिम्मेदारी बच्चे निभाते। हुए दिखाई दे रहे है। गेट का ताला खोलने के साथ अध्यापकों की कुर्सियां तक लगाने की जिम्मेदारी बच्चे ही उठा रहे हैं। वहीं जिम्मेदार अपनी नैतिकता निभाने की जगह मनमानी पर उतारू
हैं। कुछ ऐसा ही एक दृश्य सोमवार को स्थानीय विकास खंड के प्राथमिक स्कूल तुरकिनिया में देखने को मिला। जहां पर स्कूल नौ बजे खुला हुआ था। अध्यापक एक भी मौजूद नहीं थे। जबकि यहां दो शिक्षकों की तैनाती है।
वहीं एक कक्ष में सिर्फ तीन बच्चे मौजूद देखे गए। स्कूल स्थित पार्क से लेकर बरामदे में कुर्सियां व मेजें लगी हुई थीं। बच्चों ने बताया कि गुरु जी अभी नहीं आए हैं। वह आते ही होंगे। हम लोग दरवाजों को खोलकर
कुर्सियां लगाने के साथ साफ सफाई कर पढ? बैठ जाते है। अब स्कूल की दशा देखकर तो बच्चों की बात सही प्रतीत होती है। वहीं स्थानीय लोगों की माने तो गुरु जी की लापरवाही का ही नतीजा है कि यहां पर डेढ़ दर्जन के लगभग ही छात्र संख्या है। जबकि प्रधानाध्यापक की तैनाती गृह गांव में ही है, फिर भी समय से स्कूल न पहुंचना एक बेहद ही लापरवाही दिखाई दे रही है। ऐसे लापरवाह शिक्षकों की वजह से सर्व शिक्षा अभियान को सही दिशा मिल पाना संभव प्रतीत नहीं हो रहा है। इस संबंध में बीएसए भूपेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की जांच करवा कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

