रतलाम के शिक्षक के फार्मूले का दुनिया भर में डंका, साइकिल ऑफ ग्रोथ से स्कूल बना नंबर वन
रतलाम: शासकीय स्कूल के एक शिक्षक के पढ़ाने के तरीकों और शिक्षा को बेहतर करने के फार्मूले को वर्ल्ड एजुकेशन सोसाइटी द्वारा पसंद किए जा रहे हैं. जी हां सांदीपनी स्कूल के उप प्राचार्य गजेंद्र सिंह राठौर के द्वारा विकसित साइकिल ऑफ ग्रोथ फॉर्मूला और ब्रूडिंग इफेक्ट अबू धाबी में संपन्न हुई वर्ल्ड एजुकेशन समिट में छा गया है. इस फार्मूले के अंतर्गत हर बच्चे और शिक्षक का ग्रोथ डेटा कलेक्ट कर पढ़ाने के तरीकों और बच्चों में पढ़ने के प्रति रुचि पैदा की गई.
पहले शिक्षकों की ग्रुप मीटिंग और ट्रेनिंग फीडबैक प्रोग्राम बनाए गए, इसके बाद बच्चों और पेरेंट्स की भाागीदारी के साथ हर एक बच्चे की पढ़ाई और ग्रोथ का प्लान तैयार किया गया. जिसका नतीजा यह रहा कि यह सरकारी स्कूल अब विश्व के टॉप इन्नोवेटिव स्कूलों में नंबर वन पर पहुंच चुका है.
साइकिल ऑफ ग्रोथ फॉर्मूला को समझिए
रतलाम के विनोबा विद्यालय में उप प्राचार्य गजेन्द्र सिंह राठौर द्वारा साइकिल ऑफ ग्रोथ मॉडल तैयार कर इसे अपने स्कूल में सबसे पहले व्यवहारिक रूप से लागू किया. शिक्षक गजेन्द्र सिंह राठौर ने बताया कि "इसका मूल आधार यह था कि विद्यालय की दैनिक गतिविधियों जिसमें प्रार्थना से लेकर खेल गतिविधि के समय को इस प्रकार उपयोग किया जा सके कि वह पूर्ण रूप से छात्रों के शिक्षण पर केंद्रित रहे. इसकी शुरुआत शिक्षकों की ट्रेनिंग और प्रतिदिन ब्रेन हमरिंग सेशन्स आयोजित किए जाते थे.
जिनमें शिक्षक आपस में रोल-प्ले और अन्य गतिविधि करते हुए यह समझते थे कि किसी विषय को बच्चों तक बेहतर तरीके से कैसे पहुंचाया जा सकता है. इसके साथ ही शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके की ग्रोथ का डेटा संग्रह और साथ ही छात्रों की प्रतिदिन सीखने की ग्रोथ के डाटा एनालिसिस कर हर छात्र के लिए पृथक प्लान तैयार करवाया गया. शिक्षकों के बेहतर कार्य को सराहा भी गया. उन्हें टीचर ऑफ द मंथ से सम्मानित भी किया गया. जिससे प्रेरित होकर शिक्षकों ने भी ग्रुप मीटिंग्स में मिले फीडबैक के आधार पर बच्चों को पढ़ने के नए तरीके इजाद किए. जिसमें बच्चों को इमोशनली पढ़ाई के प्रति जोड़ना, उनका और अभिभावकों का इंवॉल्वमेंट बढ़ाकर पढ़ाई का माहौल बनाया गया."
9वीं से 12वीं का रिजल्ट शत-प्रतिशत
जब विनोबा विद्यालय को उन्नत करते हुए पहले सीएम राइस और बाद में सांदीपनी स्कूल रतलाम के रूप में विकसित हुआ. तब शिक्षक गजेंद्र सिंह राठौर के इन फॉर्मूलों को यहां लागू किया गया. जिसमें यहां के स्टाफ द्वारा भी उनकी मदद की गई.हालांकि आरंभिक चरण में शिक्षक और विद्यार्थी दोनों में नई कार्यप्रणाली और नई सोच को स्वीकारने में हिचक आईं लेकिन उप प्राचार्य गजेन्द्र सिंह राठौर के नेतृत्व में शिक्षकों को निरंतर प्रेरित किया गया और प्रशिक्षण दिए गए.
धीरे-धीरे बच्चों ने भी उत्साह के साथ नए तरीकों से पढ़ना शुरू किया गया. इसके लिए क्लासरूम टीचिंग के साथ बच्चों के पारिवारिक माहौल और परेशानियों का भी शिक्षकों ने फीडबैक लेकर ख्याल रखा और बच्चों के अभिभावकों को भी समझाइश देकर इस प्रोग्राम से जोड़ा. इसके बाद इस स्कूल के कक्षा 9 से 12वीं का रिजल्ट 100% रहा है.
विश्व स्तर पर मिली सराहना
हाल ही में शिक्षक गजेंद्र सिंह राठौर के साइकिल ऑफ ग्रोथ मॉडल पर आधारित वास्तविक रणनीतियों, शून्य से शिखर तक पहुंचने की प्रक्रिया और एक सरकारी स्कूल के विश्वविजेता बनने के सफर पर लिखी किताब का विमोचन वर्ल्ड एजुकेशन सम्मिट में किया गया. टी 4 एजुकेशन संस्था के विकास पोटा और अन्य विश्व स्तर के शिक्षाविदों ने इस पुस्तक का विमोचन किया. जहां दुनिया भर से आए शिक्षाविदों ने शिक्षक गजेंद्र सिंह राठौर के इस साइकिल ऑफ ग्रोथ फॉर्मूला की प्रशंसा की है.
टी 4 एजुकेशन संस्था के विकास पोटा ने कहा कि "हर विद्यार्थी, हर शिक्षक और हर शिक्षा-प्रणाली को यह समझना चाहिए कि वास्तविक परिवर्तन कैसी रणनीति और किस समर्पण से आता है. इस पुस्तक ने भारत की शिक्षा की विकास यात्रा को वैश्विक स्तर पर असाधारण मान्यता दिलाई है."

