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Sunday, November 16, 2025

प्राथमिक शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति प्रणाली पर पुनर्विचार: निगरानी नहीं, शिक्षण पर जोर हो: जानिए क्या आएँगी समस्याएं

 प्राथमिक शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति प्रणाली पर पुनर्विचार: निगरानी नहीं, शिक्षण पर जोर हो: जानिए क्या आएँगी समस्याएं

✅ *डिजिटल उपस्थिति रोकने हेतु reasons-*




1. *टेक्निकल समस्या बार-बार आती है* — ऐप हैंग, “Bad Gateway”, नेटवर्क फेल, डिवाइस स्लो होना आम समस्या है।

2. *ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की भारी कमी है*, जिससे समय पर उपस्थिति दर्ज करना असंभव हो जाता है।

3. *टैबलेट खराब या पुरानी तकनीक के हैं*, जिनमें प्रेरणा ऐप सही से काम ही नहीं करता।

4. *शिक्षकों को तकनीकी कार्य में उलझा दिया गया है*, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।

5. *डिजिटल उपस्थिति का उद्देश्य “निगरानी” है, न कि “गुणवत्ता सुधार”*, जो शिक्षकों के मनोबल को गिराता है।

6. *छात्रों की शिक्षा पर ध्यान देने के बजाय*, शिक्षक तकनीकी त्रुटियों में समय नष्ट कर रहे हैं।

7. *बार-बार OTP, Login, Logout की प्रक्रिया शिक्षकों के समय का दुरुपयोग करती है।*

8. *प्रेरणा ऐप का सर्वर कई बार डाउन रहता है*, जिससे कोई लॉगिन ही नहीं कर पाता


9. *प्रेरणा ऐप में अनावश्यक अनुमतियाँ (permissions)* शिक्षक की निजता का उल्लंघन करती हैं।

10. *वेतन रोकने जैसी दंडात्मक प्रक्रिया शिक्षक को मानसिक तनाव देती है।*

11. *अक्सर शिक्षक अपनी ड्यूटी समय पर करते हैं, फिर भी ऐप में उपस्थिति न दिखे तो उन्हें दोषी माना जाता है।*

 12. *प्रेरणा ऐप से डेटा चोरी/लीक की आशंका बनी रहती है।


13. *मूल उद्देश्य "पढ़ाना" है, न कि “मोबाइल ऑपरेट करना”।*

14. *बिजली की समस्या वाले क्षेत्रों में टैबलेट चार्ज करना भी चुनौती है।*


15. *डिजिटल उपस्थिति एकतरफा जवाबदेही थोपती है, जबकि विभागीय अधिकारी के लिए कोई ऐसी प्रणाली नहीं है।*

16. *रोजाना डिजिटल उपस्थिति शिक्षक को 'कर्मचारी' की तरह व्यवहार करने को मजबूर करती है, 'गुरु' की गरिमा समाप्त होती है।*

17. *रोजाना प्रार्थना, P.T., खेल, लाइब्रेरी, MDM, शैक्षिक गतिविधियाँ पहले से ही शिक्षकों पर भार हैं।*

18. *डिजिटल उपस्थिति में किसी भी तकनीकी कारण से अनुपस्थिति दर्शा दी जाती है*, जिससे बेवजह स्पष्टीकरण मांगा जाता है।


19. *प्रेरणा ऐप की गिनती के नाम पर MDM, Enrollment, और अन्य प्रविष्टियाँ शिक्षक को क्लर्क बना देती हैं।*

20. *महिलाओं को सुबह जल्दी आने में पारिवारिक चुनौतियाँ होती हैं, डिजिटल समयबद्धता उन पर दबाव बनाती है।*

21. *शिक्षकों के विरुद्ध छोटी त्रुटियों पर निलंबन/वेतन रोक जैसे आदेश अनुचित दबाव उत्पन्न करते हैं।*


22. *शिक्षक को हर समय GPS ट्रैक किया जाना निजता के अधिकार का हनन है।*

23. *शिक्षा की गुणवत्ता पर इसका कोई सीधा प्रभाव सिद्ध नहीं हुआ है।*

24. *सभी विद्यालयों में स्मार्टफोन, पावर बैकअप, नेटवर्क उपलब्ध नहीं है।*

25. *शिक्षकों के पास टेक्निकल सपोर्ट की व्यवस्था नहीं है।*

26. *विद्यालय भवन/प्रांगण में नेटवर्क न होने से शिक्षक को बाहर जाकर उपस्थिति लगानी  पड़ती है।*

27. *डिजिटल उपस्थिति पर अधिक ज़ोर देने से वास्तविक कार्य जैसे पठन-पाठन पीछे छूट जाते हैं।*


28. *प्रेरणा ऐप केवल एक निगरानी ऐप बन चुका है, जिससे शिक्षक अपमानित महसूस करते हैं।*

29. *कई जगह प्रेरणा ऐप ऐपल डिवाइस या कुछ Android वर्जन में चलता ही नहीं।*

30. *शिक्षकों के कार्य की ईमानदारी तकनीकी उपस्थिति से नहीं, उनके शिक्षण कार्य से आंकी जानी चाहिए।*


*निष्कर्ष*:  


डिजिटल उपस्थिति का उद्देश्य *गुणवत्ता में सुधार* नहीं बल्कि *निगरानी व दंड* बन गया है। यह शिक्षक-छात्र के बीच के पवित्र रिश्ते में बाधा डालता है। अतः प्राथमिक विद्यालयों में इसे बंद करना या पुनः विचार करना अत्यावश्यक है।

प्राथमिक शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति प्रणाली पर पुनर्विचार: निगरानी नहीं, शिक्षण पर जोर हो: जानिए क्या आएँगी समस्याएं Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Huebhdhdj

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