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Friday, February 27, 2026

अहम बदलाव : एनपीएस वात्सल्य की 100% रकम इक्विटी में लगा सकेंगे

अहम बदलाव : एनपीएस वात्सल्य की 100% रकम इक्विटी में लगा सकेंगे

पेंशन फंड रेगुलेटर पीएफआरडीए ने एनपीएस वात्सल्य योजना में अहम बदलाव करते हुए अब पेंशन फंड्स को 100% तक इक्विटी में निवेश करने का इजाजत दे दी है। इसके अलावा पेंशन फंड्स को बच्चों के पेंशन खाते से जुड़ी चुनिंदा जानकारी मिलेगी।


इन बदलावों का उद्देश्य इस योजना को ज्यादा जुड़ाव वाला बनाना है, ताकि बच्चों का पैसा लंबे समय में बेहतर तरीके से बढ़ सके।




इन नियमों के तहत पेंशन फंड्स को अब अंशधारक की जानकारी तक सीमित और नियंत्रित पहुंच मिलेगी, साथ ही निवेश को लेकर उन्हें पहले से ज्यादा लचीलापन दिया गया है। यह सर्कुलर 23 फरवरी 2026 को जारी किया गया और इसे सभी पेंशन फंड्स और एनपीएस से जुड़े बाकी सभी हितधारकों को भेजा गया है।




निवेश को लेकर भी पीएफआरडीए ने बड़ा बदलाव किया है। एनपीएस वात्सल्य योजना दिशा-निर्देश, 2025 के पैरा 12 के तहत अब अलग-अलग पेंशन फंड अपने निवेश की शैली में फर्क रख सकते हैं, बशर्ते वे तय सीमाओं के अंदर रहें। इसका मतलब यह है कि हर पेंशन फंड की निवेश रणनीति और परफॉर्मेंस अलग हो सकती है। सर्कुलर में कहा गया है कि पेंशन फंड्स चाहें तो पीएफआरडीए द्वारा तय किया गया सामान्य संपत्ति आवंटन अपनाएं, जिसमें किसी भी संपत्ति श्रेणी में न्यूनतम निवेश की बाध्यता नहीं होगी। या फिर वे अपनी खुद की निवेश रणनीति बना सकते हैं।


डाटा साझा करने का लाभ?


एनपीएस वात्सल्य 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पेंशन योजना है, जिसे माता-पिता चलाते हैं। नए सर्कुलर के तहत सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियां अब पेंशन फंड्स के साथ कुछ तयशुदा जानकारी साझा करेंगी। इसमें माता-पिता के बारे में जानकारी, बच्चे का लिंग और पैसे जमा करने का तरीका जैसी बातें शामिल होंगी। इसके अलावा उनका राज्य/इलाका, महिला-पुरुष अनुपात, योगदान करने के तरीके से जुड़ी जानकारी शामिल होगी।


जोखिम ज्यादा, लेकिन फायदा भी


योजना के तहत छोटे बच्चों के लिए जिनके पास 15-20 साल का लंबा समय है, ज्यादा इक्विटी निवेश से बाजार के उतार-चढ़ाव को झेलते हुए लंबे समय में बेहतर कंपाउंडिंग मिल सकती है। हालांकि, कम समय में उतार-चढ़ाव का जोखिम बना रहता है। जानकारों का कहना है कि 50-60 साल जैसी लंबी निवेश अवधि और ज्यादा जोखिम लेने की क्षमता रखने वालों के लिए यह विकल्प उपयुक्त हो सकता है। उनका मानना है कि सालाना रिटर्न में सिर्फ 1-2 प्रतिशत का फर्क भी कई दशकों में बड़ा अंतर पैदा कर सकता है।


नए नियमों का मकसद


पीएफआरडीए ने साफ कहा है कि इन नियमों का मकसद पेंशन फंड्स को यह ताकत देना है कि वे डाटा के आधार पर सही रणनीति बना सकें, योजना का प्रचार कर सकें, ज्यादा लोगों को जोड़ सकें और एनपीएस वात्सल्य को लंबे समय तक मजबूत बना सकें। साथ ही इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, सब्सक्राइबर की सुरक्षा होगी और जरूरत पड़ने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे। अगर कोई मध्यस्थ या पेंशन फंड इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर नियामिकीय कार्रवाई की जाएगी।

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