बजट के बाद भी 52 जिलों ने नहीं की शुल्क प्रतिपूर्ति
सौ से 60 फीसदी तक 12 जिलों ने खर्च किया
वित्तीय सहायता की रकम खर्च करने में जिलों की स्थिति और भी खराब है। सिर्फ 12 जिलों ने 100 प्रतिशत से लेकर 59.26 प्रतिशत तक धनराशि खर्च की है। जिन 12 जिलों ने धनराशि खर्च करने में दिलचस्पी दिखाई उसमें गौतमबुद्ध नगर, बांदा, सुल्तानपुर, मैनपुरी, बुलंदशहर, प्रतापगढ़, सीतापुर, बागपत, कुशीनगर, बस्ती, गाजियाबाद और गोरखपुर शामिल हैं।
लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में गरीब परिवार के बच्चों को मुफ्त दाखिला देने पर राज्य सरकार शुल्क प्रतिपूर्ति करती है। शैक्षिक सत्र 2025-26 में शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए कुल 276 करोड़ रुपये की धनराशि जिलों को जारी की गई थी। इसमें से मात्र 89.40 करोड़ यानी 32.45 प्रतिशत धनराशि की खर्च की गई। 52 जिलों ने शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम में से एक पाई भी खर्च नहीं की।
जिलों में निजी स्कूलों को आरटीई के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम देने में बरती जा रही लापरवाही पर बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने लापरवाह बेसिक शिक्षा अधिकारियों को फटकार लगाई है। 23 जिलों ने शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि को खर्च करने में दिलचस्पी दिखाई है। सर्वाधिक प्रयागराज ने 4.35 करोड़ की आवंटित धनराशि में से शत प्रतिशत, बलिया ने भी 5.26 करोड़ में से शत प्रतिशत, गौतमबुद्ध नगर ने 7.57 करोड़ में से 6.96 करोड़ रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति पर खर्च किए हैं। 92 प्रतिशत धनराशि यहां खर्च की गई। वहीं बांदा में 19.99 करोड़ में से 16.96 करोड़ और सुल्तानपुर में 11.25 करोड़ में से 9.35 करोड़ रुपये खर्च किए गए। ऐसे ही मैनपुरी, बुलंदशहर, प्रतापगढ़, सीतापुर, बागपत ने खर्च में दिलचस्पी दिखाई है।

