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Tuesday, March 31, 2026

गोरखपुर की शिक्षिका दिव्या सिंह ने रचा इतिहास, माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पर लहराया तिरंगा

गोरखपुर की शिक्षिका दिव्या सिंह ने रचा इतिहास, माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पर लहराया तिरंगा


गोरखपुर की शिक्षिका दिव्या सिंह ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट बेस कैंप (17,560 फ़ीट) पर साइकिल से पहुंच कर विश्व रिकार्ड बनाया गोरखपुर की शिक्षिका दिव्या सिंह एवरेस्ट बेस कैंप (Hight 17,560 Feet) पर साइकिल से पहुंचने में सफलता पाई है. वे ऐसा रिकार्ड बनाने वाली देश की पहली और विश्व की दूसरी महिला बनने का रिकार्ड बनाया है. उन्होंने ये रिकार्ड 24 मार्च को बनाया है, जिस समय वे एवरेस्ट बेस कैंप पर पहुंची, वहां का तापमान -12 डिग्री था. उनका मंगलवार 31 मार्च को गांव पहुंचने पर भव्य स्वागत हुआ.


जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर के पिपरौली ब्लॉक के अमरौटा के बनौड़ा के रहने वाले संतराज सिंह और श्रीमती उर्मिला सिंह की 28 वर्षीय पुत्री दिव्या सिंह पेशे से शिक्षिका हैं. उनका शौक साइकिलिंग और ट्रैकिंग है. उन्होंने 24 मार्च मंगलवार को विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट बेस कैंप (17,560 फ़ीट) पर साइकिल से पहुंच कर विश्व रिकार्ड बनाया. ऐसा करने वाली भारत की पहली और विश्व की दूसरी महिला बनी. उस समय एवरेस्ट बेस कैंप पर तापमान माइनस 12 डिग्री था.


काठमांडू से हुई साइकल यात्रा की शुरुआत

दिव्या सिंह के मुताबिक, इस साइकिल यात्रा की शुरुआत 16 मार्च को काठमांडू से हुई. इस यात्रा में काठमांडू, सलेरी, सुरखे, फॉकडिंग, सागरमाथा नेशनल पार्क, नामचे बाजार, डीबोचे, फिरचे, लोबुचे, गोरखशेप, होते हुए माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पर पहुंची. इस साइकिल यात्रा में कुल 14 दिन लगे. इस यात्रा में बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.


उन्होंने कहा कि मौसम बहुत ही ज्यादा खराब था. हर दिन स्नोफॉल और बारिश होती रही और कभी कभी तो पूरे दिन ये सिलसिला चलता रहा. इसके साथ ही तेज ठंडी हवा लगातार पूरे दिन चलती थी. दिन में भी तापमान माइनस में चला जाता था. यह सफर जितना खूबसूरत था, उतना ही कठिन भी रहा है.


साइकल को कंधे पर उठा कर चलना पड़ा


एवरेस्ट बेस कैंप पर चढ़ाई का रास्ता ऐसा था कि हर दिन आधे से ज्यादा समय साइकिल को कंधे पर उठाकर चलना पड़ा. ग्लेशियर के बीच, वातावरण में कम ऑक्सीजन, ऊँचाई, ठंड, थकान और दर्द सब एक साथ थे. ऑक्सीजन की कमी और हृदय गति 120 प्रति मिनट होने के कारण सांस फूलने लगती थी. हर दिन लगभग 10 से 12 घंटे साइकिलिंग करनी पड़ती थी.


दिव्या सिंह गाइड के तौर पर कोच और Rust adventure company के एमडी उमा सिंह के निर्देशन में ये साइकिल यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की है. इस अभियान के लिए फ्लैग ऑफ, विकास भवन से जिला समाज कल्याण अधिकारी वशिष्ठ नारायण सिंह, डीसी मनरेगा रघुनाथ सिंह, डीपीआरओ नीलेश प्रताप सिंह आदि के द्वारा किया गया.

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