शिक्षिका बनना चाहती थी, अब आईएएस बनकर करूंगी सेवा: शिखा
होनहार बेटी शिखा गौतम ने अपनी कड़ी मेहनत और अटूट संकल्प से वह मुकाम हासिल किया है, जो हजारों युवाओं के लिए मिसाल बन गया है। यूपीएससी की प्रतिष्ठित परीक्षा में 113वीं रैंक प्राप्त कर आईएएस अधिकारी बनने के बाद रविवार को रविवार को शिखा पहली बार अपने घर पहुंचीं। परिजनों ने ढोल-नगाड़ों की थाप और फूल-मालाओं के साथ पलक-पांवड़े बिछाकर भव्य स्वागत किया। शिखा ने बताया की यदि कुछ करने की ठान ली जाए, तो संसाधनों की कमी सफलता के आड़े नहीं आती। संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सर्विसेज परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया है। इसमें जिले के कई युवाओं को सफलता मिली है।
इनमें नगर के भूड़ स्थित अंबेडकर नगर निवासी प्रेमचंद की पुत्री शिखा ने भी 113 वीं रैंक लाकर जिले का नाम रोशन किया है। शिखा का चयन अधिकारी के रूप में होना उनके परिवार के लिए अत्यंत भावुक क्षण है। रविवार को जैसे ही वह घर पहुंची तो लोगों ने फूल माला पहनाकर उनका जोरदार स्वागत किया और उन्हें मिठाई खिलाकर बधाई दी। शिखा के पिता प्रेमचंद वर्तमान में स्याना के इंदिरा गांधी इंटर कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। वहीं, उनके दादा ज्ञानचंद भी डीआईओएस कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत रहे थे। शिखा ने बताया की यह सफर चुनौतियों भरा रहा है। परिवार के लोगों का सपना था की प्रशासनिक सेवा में जाकर वह देश का नाम रोशन करे। बीच में आर्थिक तंगी के कारण एक साल तक उनकी पढ़ाई भी छूट गई थी, लेकिन शिखा ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने दोबारा अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया और अपने दूसरे प्रयास में ही यह गौरवशाली सफलता हासिल कर ली। शिखा ने बताया कि वह शुरुआत में शिक्षिका बनना चाहती थीं, लेकिन पढ़ाई के दौरान उनका रुझान सिविल सेवा की ओर बढ़ा और वह लक्ष्य प्राप्ति में जुट गईं। मयाबी पर खुशी जाहिर करते हुए शिखा ने युवाओं को प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो दुनिया में कुछ भी नामुमकिन या असंभव नहीं है। कठिन परिस्थितियां आपको रोकने के लिए नहीं, बल्कि आपकी क्षमता परखने के लिए आती हैं।

