यूपी टीईटी में पहली बार ईडब्ल्यूएस को भी मिलेगा आरक्षण
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) 2026 में पहली बार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से 20 मार्च को जारी गाइडलाइन में प्रावधान किया गया है। अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को पूर्णांक 150 में से 90 अंक अर्थात 60 प्रतिशत और अधिक अंक प्राप्त करने पर पात्रता प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। वहीं अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग/ईडब्ल्यूएस/स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित/भूतपूर्व सैनिक व दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अर्हक अंक 55 प्रतिशत अर्थात् पूर्णांक 150 में से 82 अंक होगा।
यूपी-टीईटी में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के अंकों का विवरण आयोग की वेबसाइट पर जारी किया जाएगा। इससे पहले 2021 में आयोजित यूपी-टीईटी में ईडब्ल्यूएस वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिला था। ये अलग बात है कि केंद्र सरकार ने जनवरी और उत्तर प्रदेश सरकार ने फरवरी 2019 में ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू किया था। चयन आयोग के पीआरओ डॉ. संजय कुमार सिंह का कहना है कि ईडब्ल्यूएस वर्ग को अन्य आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के समान अर्हक अंक में पांच प्रतिशत की छूट दी गई है। इसके लिए शासन की अनुमति ली गई है।
एनसीटीई ने छूट का किया है प्रावधान
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की टीईटी गाइडलाइन 2011 में स्पष्ट प्रावधान है कि स्कूल प्रबंधन (सरकारी, स्थानीय निकाय, सहायता प्राप्त और अशासकीय) एस/एसटी, ओबीसी, दिव्यांगजन आदि आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को अपनी मौजूदा आरक्षण नीति के अनुसार छूट दे सकते हैं। जानकारों की मानें तो उत्तर प्रदेश सरकार ने ईडब्ल्यूएस वर्ग को टीईटी के अर्हक अंक में छूट देने का प्रावधान किया है, जो संवैधानिक न्याय और सामाजिक समावेशन की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
स्क्रूटनी के आवेदन पर नहीं होगा विचार
आयोग के उपसचिव डॉ. संजय कुमार सिंह के अनुसार मशीन (इलेक्ट्रॉनिक संसाधन) के माध्यम से स्कैनिंग किए जाने वाले मूल्यांकन में अत्यंत सावधानी बरती जाती है व इनकी बारंबार संवीक्षा की जाती है। ओएमआर उत्तर पत्रक की पुनः जांच, पुनः आंकलन, पुनः मूल्यांकन अथवा संवीक्षा के लिए निवेदन व इस संबंध में कोई पत्राचार स्वीकार नहीं किया जाएगा।

