प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में फर्जी डिग्री बनाने और बेचने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मामले की जांच के दौरान अब तक प्रदेश के करीब 60 एजुकेशन सेंटर जांच के दायरे में आ चुके हैं। पुलिस ने इस रैकेट के सरगना समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की फर्जी वेबसाइट तैयार कर रखी थी। इसके जरिए विभिन्न विश्वविद्यालयों के नाम पर नकली डिग्री, मार्कशीट और माइग्रेशन प्रमाण पत्र तैयार कर बेचे जाते थे। गिरोह से जुड़े एजुकेशन सेंटर छात्रों की जानकारी उपलब्ध कराते थे, जिसके बाद उन्हें जाल में फंसाकर फर्जी दस्तावेज दिए जाते थे।
जांच के अनुसार, आरोपियों द्वारा छात्रों से चार से पांच हजार रुपये तक वसूले जाते थे। पुलिस को आरोपियों के पास से छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय, वीर बहादुर सिंह विश्वविद्यालय समेत कई संस्थानों के नाम पर बनी फर्जी डिग्रियां और दस्तावेज बरामद हुए हैं। इसके अलावा कोरियर के लिफाफे भी मिले हैं, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि गिरोह विभिन्न राज्यों में सक्रिय था।
मोबाइल फोन की जांच और आरोपियों से पूछताछ में कई अन्य जिलों के युवकों के नाम भी सामने आए हैं, जो इस नेटवर्क के साथ मिलकर काम कर रहे थे। पुलिस अब इन सभी संदिग्धों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।
एसपी साइबर क्राइम राजकुमार मीना ने बताया कि पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं और जल्द ही सभी आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
👉 प्रशासन की अपील:
छात्रों और अभिभावकों से अपील की गई है कि वे किसी भी अनधिकृत वेबसाइट या एजुकेशन सेंटर के झांसे में न आएं और केवल मान्यता प्राप्त संस्थानों से ही शिक्षा संबंधी दस्तावेज प्राप्त करें।

