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Sunday, April 26, 2026

डेटा की वेदी पर बलि होती शिक्षा: शिक्षक 'क्लरिक' और कक्षा 'पोर्टल' कब तक?"

 डेटा की वेदी पर बलि होती शिक्षा: शिक्षक 'क्लरिक' और कक्षा 'पोर्टल' कब तक?"

सच यह है कि शिक्षक कभी काम से नहीं घबराया। वह तो वर्षों से कम वेतन, कम संसाधन और ज़्यादा अपेक्षाओं के साथ काम करता आया है।


36 ऐप चलानी हों, पोर्टल भरने हों, रिपोर्ट अपलोड करनी हो—शिक्षक कर लेता है।


बीएलओ की ड्यूटी हो या जनगणना या कोई और काम—वह भी निभा देता है।


शिक्षक इन सब से परेशान नहीं है।❌




👉 वह परेशान है क्योंकि इन सबके बीच बच्चे पीछे छूट रहे हैं।


शिक्षा कोई ऐप नहीं है जिसे अपडेट कर दिया जाए।👍🏼


शिक्षा कोई सर्वे नहीं है जिसे दो दिन में निपटा दिया जाए।👍🏼


शिक्षा रोज़ माँगती है—समय, ध्यान और शिक्षक की उपस्थिति।✔️


लेकिन शिक्षक को कक्षा से हटाकर हर उस जगह खड़ा कर दिया गया है जहाँ पढ़ाई का कोई रिश्ता नहीं।


फिर सवाल उठता है—“बच्चों का स्तर क्यों गिर रहा है?”


जब शिक्षक कक्षा में कम और पोर्टल में ज़्यादा रहेगा, तो ज्ञान नहीं, सिर्फ़ डेटा बनेगा।


आज शिक्षा बिगड़ नहीं रही—


👉 उसे बिगाड़ा जा रहा है।


सबसे बड़ा व्यंग्य यह है कि शिक्षा की हालत के लिए उसी शिक्षक को दोषी ठहराया जा रहा है, जिससे पढ़ाने का अधिकार छीना जा रहा है।


हाँ, सरकार ने शिक्षक से हर काम लिया—


👉 सिवाय पढ़ाने के।


क्योंकि ऐप से रिपोर्ट बनती है,


लेकिन 👉 देश बच्चों से बनता है।


और जब शिक्षक बच्चों के पास नहीं होगा, तो भविष्य किसी पोर्टल पर अपलोड नहीं होगा।







डेटा की वेदी पर बलि होती शिक्षा: शिक्षक 'क्लरिक' और कक्षा 'पोर्टल' कब तक?" Rating: 4.5 Diposkan Oleh: UP UPDATEMART

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