भीषण गर्मी में स्कूल टाइमिंग पर बहस: क्या बदलना ही समाधान है या छुट्टियां बढ़ाना जरूरी?
लखनऊ/प्रदेश। प्रदेश में बढ़ती गर्मी के बीच स्कूलों की टाइमिंग में बदलाव को लेकर बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर प्रशासन ने गर्मी से राहत के लिए स्कूल का समय सुबह 7 बजे से 12:30 बजे तक कर दिया है, वहीं शिक्षकों और अभिभावकों का मानना है कि यह बदलाव पर्याप्त नहीं है।
☀️ धूप में घर लौटते बच्चे—सबसे बड़ी चिंता
शिक्षकों का कहना है कि समय बदलने के बावजूद बच्चे जब स्कूल से घर लौटते हैं, तब दोपहर की तेज धूप और लू का सामना करना पड़ता है।
छोटे-छोटे बच्चे भारी स्कूल बैग और खाली पानी की बोतल के साथ तपती गर्मी में घर जाते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
👩🏫 शिक्षकों की भी वही स्थिति
केवल बच्चे ही नहीं, बल्कि शिक्षक भी इस भीषण गर्मी से प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि जब वे खुद दोपहर में स्कूल से निकलते हैं तो सिर चकराने जैसी स्थिति हो जाती है, ऐसे में छोटे बच्चों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
📅 पुराने सिस्टम की याद
कई शिक्षक और अभिभावक पुराने समय को बेहतर मानते हैं, जब 1 मई से 30 जून तक लगभग दो महीने की गर्मी की छुट्टियां होती थीं।
उनका तर्क है कि उस समय न तो बच्चों को इतनी गर्मी झेलनी पड़ती थी और न ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती थीं। जुलाई में मौसम सुहावना होने पर स्कूल खुलते थे, जिससे पढ़ाई का माहौल भी बेहतर रहता था।
🙏 शिक्षा विभाग से मांग
शिक्षकों ने शिक्षा विभाग से अपील की है कि केवल टाइमिंग बदलने के बजाय गर्मी की छुट्टियों के पुराने कैलेंडर को फिर से लागू किया जाए।
उनका कहना है कि बच्चों की सेहत किसी भी टाइम-टेबल से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
❤️ एक शिक्षक और माता-पिता की भावना
कई शिक्षक खुद अभिभावक भी हैं। उनका कहना है कि जब उनका अपना बच्चा धूप में झुलसकर घर आता है, तब इस समस्या की गंभीरता और अधिक समझ आती है।
स्कूल टाइमिंग बदलना एक अस्थायी समाधान हो सकता है, लेकिन बढ़ती गर्मी और हीट वेव के दौर में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है।
सरकार को दीर्घकालिक समाधान पर विचार करना होगा, ताकि बच्चों और शिक्षकों दोनों को राहत मिल सके।

