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Thursday, April 16, 2026

सरकारी ताले में बंद पड़ा नौनिहालों का किताबी ज्ञान

 सरकारी ताले में बंद पड़ा नौनिहालों का किताबी ज्ञान




सरकार एक ओर स्कूल चलो अभियान के जरिये शिक्षा के स्तर को सुधारने का दम भर रही है, वहीं बाराबंकी में जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। नए शैक्षिक सत्र 2026-27 का आधा महीना बीत जाने के बाद भी परिषदीय स्कूलों के हजारों छात्र किताबों के लिए तरस रहे हैं।


​विडंबना यह है कि जो किताबें बच्चों के हाथों में होनी चाहिए थीं, वे बीआरसी और बीईओ कार्यालयों में कैद हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले में इस सत्र के लिए कुल 156 प्रकार की लगभग 20 लाख किताबें आनी हैं, लेकिन अब तक केवल 116 प्रकार की पुस्तकें ही उपलब्ध हो पाई हैं। शेष 40 श्रेणियों की करीब 88 हजार किताबों का अता-पता नहीं है।


​सबसे खराब असर कक्षा 6 से 8 के छात्रों पर पड़ा है। कई स्कूलों में शिक्षक कक्षा में पहुंच रहे हैं, लेकिन बच्चों के पास पलटने के लिए पन्ने तक नहीं हैं।


​दरियाबाद समेत कई ब्लॉकों में भारी लापरवाही: दरियाबाद समेत कई विकास खंडों में किताबों के भारी भरकम बंडल बीआरसी केंद्रों पर उतार दिए गए हैं, लेकिन उन्हें स्कूलों तक भेजने की जहमत नहीं उठाई गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति में जुटे हैं, जबकि छात्र बिना किताबों के पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

​बीएसए बोले- होगी सख्त कार्रवाई: इस गंभीर मामले पर बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) नवीन कुमार पाठक का कहना है कि 95 प्रतिशत किताबें बीईओ के माध्यम से आवंटित की जा चुकी हैं। हालांकि, उन्होंने बीआरसी केंद्रों पर किताबें डंप होने की शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए कहा कि इस मामले की गहन जांच कराई जाएगी। बीएसए ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वितरण कार्य में ढिलाई बरतने वाले दोषियों और संबंधित बीईओ के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


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