मतदान के लिए नहीं कर सकते बाध्य
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि लोगों को चुनाव में मतदान करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने देश में मतदान को अनिवार्य और जानबूझकर मतदान से दूर रहने वाले नागरिकों के लिए दंडात्मक कार्रवाई करने का आदेश देने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली हुए कहा कि चुनावों में भागीदारी को जबरदस्ती के उपायों से लागू नहीं कर सकते। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कानून के शासन द्वारा संचालित लोकतंत्र में नागरिकों से अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन लोगों को मजबूर नहीं किया जा सकता। इससे पहले, याचिकाकर्ता गोयल की ओर से पेश अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि अदालत भारत के निर्वाचन आयोग को एक समिति गठित करने का निर्देश दे सकता है। यह समिति मतदान को अनिवार्य बनाने के लिए दिशानिर्देश तैयार करेगी और उन लोगों के लिए कुछ सरकारी सुविधाओं तक पहुंच पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करेगी, जो बिना किसी वैध कारण के मतदान करने में विफल रहते हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सवाल उठाते हुए कहा कि कोई व्यक्ति मतदान
के लिए नहीं जाता है, तो हम क्या कर सकते हैं? क्या हमें यह निर्देश देना चाहिए कि उसे गिरफ्तार किया जाए? अदालत ने जोर दिया कि मतदाताओं की भागीदारी मूल रूप से नागरिक जागरूकता का विषय है, न कि कानूनी बाध्यता का।

