पैसे निकालने के लिए बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई
पैसे निकालने के लिए बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई
भुवनेश्वर/क्योंझर। गरीबी और लाचारी की इस दर्दनाक तस्वीर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इन्सानियत को शर्मसार करती यह तस्वीर ओडिशा के क्योंझर जिले की है। सिस्टम की सड़ांध और कागजी नियमों के आगे एक गरीब आदिवासी इतना बेबस हो गया कि उसे कब्र खोदकर अपनी मृत बहन का कंकाल निकालना पड़ा। मौत का सबूत देने के लिए उसने कंकाल को कंधे पर उठाया और तीन किलोमीटर पैदल चलकर सोमवार को बैंक पहुंचा।
डियानाली गांव के आदिवासी जीतू मुंडा (50) बहन के खाते में जमा 19,300 रुपये निकालने के लिए ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा के कई चक्कर लगा चुके थे। जानकारी के मुताबिक, जीतू की बहन कालरा मुंडा (56) तीन महीने पहले ही मर चुकी थी। बैंक के कर्मचारियों ने उसे खाताधारक को लाने या मृत्यु प्रमाणपत्र पेश करने को कहा, लेकिन निरक्षर जीतू के लिए उनकी बातें समझ से परे थीं। आजिज आकर उसने यह कदम उठाया। एजेंसी
माफ कीजिए! यह तस्वीर विचलित कर सकती है, पर यह हमारे सिस्टम का शव है...इसे दिखाना जरूरी है
आदिवासी जीतू मुंडा मृत बहन के कंकाल को कंधे पर उठाकर तीन किमी चलकर बैंक पहुंचा।
जीतू का दर्द...बैंक वाले सुन नहीं रहे थे, मैं क्या करता
जीतू ने पत्रकारों को बताया, मैंने बैंक को बताया कि बहन की मृत्यु हो चुकी है, फिर भी उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी और उसे बैंक लाने पर अड़े रहे। तब मैंने कब्र से उसकी मृत्यु के प्रमाण के रूप में उसका कंकाल निकाल लिया। कंकाल को कपड़े और बोरी में लपेटकर कंधे पर रखा और बैंक में पेश किया। बैंक सूत्रों के अनुसार, कालरा के खाते के नॉमिनी उनके बड़े भाई रायबू मुंडा थे, लेकिन उनकी भी मौत हो चुकी है। इसलिए पैसे का जीतू ही एकमात्र दावेदार था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है और लोग व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
* पहले सफाई दी, फिर सौंपी रकम...इंडियन ओवरसीज बैंक ने सफाई दी कि उसके प्रायोजित ओडिशा ग्रामीण बैंक ने मृत महिला की शारीरिक उपस्थिति की मांग नहीं की थी। जीतू को बताया था कि खाते से पैसे निकालने के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र और जरूरी दस्तावेज जमा करना अनिवार्य है। हालांकि बाद में जीतू को खाते की पूरी रकम सौंप दी गई। वहीं, इलाके के बीडीओ ने बताया कि जीतू को 20 हजार रुपये की मदद की गई है।
* थाना प्रभारी इंस्पेक्टर किरण प्रसाद साहू ने कहा, जीतू अनपढ़ है। उसे नहीं पता कि कानूनी वारिस या नामित क्या होता है। उसे समझाकर बहन के कंकाल को कब्रिस्तान में दोबारा दफना दिया गया।

