इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: वर्षों बाद शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करना गलत, आदेश निरस्त
प्रयागराज | 13 अप्रैल 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में राज्य अधिकारियों द्वारा जारी उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनके तहत लगभग 20 वर्ष पहले नियुक्त दो सहायक शिक्षकों की सेवाओं को शून्य घोषित कर दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक बिना बाधा सेवा देने वाले कर्मचारियों के पक्ष में अधिकार उत्पन्न होता है, जिसे केवल तकनीकी आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता, जब तक कोई धोखाधड़ी सिद्ध न हो।
📌 क्या था मामला?
याचिकाकर्ता श्रीमती मीनाक्षी शर्मा व अन्य की नियुक्ति वर्ष 2006 में जनपद गौतम बुद्ध नगर के एक सहायता प्राप्त विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में हुई थी।
नियुक्ति विधिवत प्रक्रिया के तहत की गई थी
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की अनुमति ली गई थी
चयन समिति द्वारा साक्षात्कार के बाद चयन हुआ था
बाद में वर्ष 2018 में उनके वेतन भुगतान को स्वीकृति भी मिल गई थी।
⚖️ विवाद कैसे शुरू हुआ?
बकाया वेतन के मामले में कोर्ट के निर्देश के बाद, संबंधित अधिकारियों ने सीमा से बाहर जाकर
👉 वर्ष 2006 की मूल नियुक्ति को ही अवैध घोषित कर दिया
👉 शिक्षकों के कार्य पर रोक लगा दी
👉 पूर्व स्वीकृतियों को भी निरस्त कर दिया
🧑⚖️ हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियां
अदालत ने पाया कि अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य किया है।
👉 कोर्ट ने कहा:
अधिकारियों को केवल वेतन और बकाया राशि पर निर्णय लेना था
नियुक्ति की वैधता दोबारा जांचना उनके अधिकार में नहीं था
👉 साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि:
वर्षों बाद तकनीकी आधार पर नियुक्ति रद्द करना अनुचित है
यदि कोई धोखाधड़ी नहीं है, तो कर्मचारी को संरक्षण मिलना चाहिए
📚 योग्यता विवाद पर क्या कहा?
कोर्ट ने माना कि
बी.एड. योग्यता उस समय अनिवार्य नहीं थी
पूर्व में सुप्रीम कोर्ट भी ऐसे मामलों में नियुक्त शिक्षकों को राहत दे चुका है
⚠️ प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन
अदालत ने यह भी पाया कि:
आदेश बिना नोटिस और सुनवाई के पारित किए गए
यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है
📝 कोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने
👉 26 अगस्त, 30 अगस्त, 1 सितंबर और 8 सितंबर 2025 के सभी आदेश रद्द कर दिए
साथ ही निर्देश दिया कि
👉 याचिकाकर्ताओं को उनके सभी वैध लाभ प्रदान किए जाएं
📊 केस से जुड़ी जानकारी
मामला: मीनाक्षी शर्मा व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य
केस नंबर: रिट-A संख्या 18434/2025
न्यायाधीश: जस्टिस मंजू रानी चौहान
निर्णय तिथि: 13 अप्रैल 2026
यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए राहत भरा है, जो वर्षों से सेवा दे रहे हैं। अदालत ने साफ संदेश दिया है कि
👉 लंबी सेवा और बिना गलती के नियुक्ति को केवल तकनीकी आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता।














