कैंसर से जूझती शिक्षिका का शव फ्लैट में मिला, तलाक के बाद टूटी संवेदनाएं मौत पर जुड़ीं
सुपरटेक ग्रीन विलेज के फ्लैट नंबर एच-314 में दो सालों से बंद दरवाजों के पीछे एक महिला शिक्षिका अपनी जिंदगी का आखिरी अध्याय लिख रही थीं। मुजफ्फरनगर की निवासी 40 वर्षीय अंशिता प्रभाकर पेट के कैंसर की चपेट में थीं। सोमवार रात वे हमेशा के लिए सो गईं।
मंगलवार सुबह खाना लाने वाले युवक ने जब दरवाजा खटखटाया तो अंदर सन्नाटा था। उसने गेट पर सिक्योरिटी को सूचना दी। इसके बाद ब्रह्मपुरी थाने की टीम पहुंची, फोरेंसिक जांच हुई और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
तलाक की कड़वी यादों से भरा था जीवन
अंशिता का जीवन तलाक की कड़वी यादों से भरा था। हापुड़ के न्यू शिवपुरी निवासी अमित नागर से अंशिता की शादी हुई थी। एक बेटा और एक बेटी हुई। इसके बाद सब टूट गया। दो साल पहले ससुराल और मायका दोनों छोड़कर अंशिता मेरठ आ बसीं। ट्यूशन पढ़ाकर गुजारा चलाती रहीं, लेकिन कैंसर ने सब कुछ लील लिया।
23 मार्च को हापुड़ रोड के एपेक्स अस्पताल में भर्ती हुईं, डाक्टरों ने ब्लड चढ़ाया, 25 मार्च को घर लौटीं। मंगलवार को ही अस्पताल से उनकी जांच रिपोर्ट भी घर पहुंची, ठीक उसी वक्त जब पुलिस शव बाहर निकाल रही थी।
मौत की खबर फैली तो वही रिश्तेदार जो जिंदा रहते दूर थे, शव के पास आ गए। पति बच्चों संग पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, मायके पक्ष के लोग भी। रात में शव का पोस्टमार्टम हुआ।
थाना प्रभारी राजेश कांबोज ने बताया कि कमरे में सिर्फ दवाइयां मिलीं, मौत कैंसर से प्राकृतिक लगती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सही कारण सामने आएंगे। अंशिता की कहानी सवाल छोड़ गई, अकेलेपन में जूझते लोगों की पीड़ा समाज उनके जिंदा रहते क्यों नहीं सुन पाता?

