BSA कार्यालय में भ्रष्टाचार के आरोपों से हड़कंप, 'यूटा' ने 65 पन्नों की फाइल मुख्यमंत्री को भेजी
शाहजहाँपुर | उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले में बेसिक शिक्षा विभाग (BSA) कार्यालय एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) के जिलाध्यक्ष विनीत गंगवार ने विभाग में व्याप्त कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक विस्तृत डॉजियर तैयार किया है। 65 पन्नों की इस भारी-भरकम फाइल को जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्य सचिव और महानिदेशक स्कूल शिक्षा को भेजा गया है।
वेतन बहाली और बजट गबन के गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में जिलाध्यक्ष विनीत गंगवार ने कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं:
वसूली का चक्र: आरोप है कि शिक्षकों का वेतन पहले जानबूझकर अवरुद्ध किया जाता है और फिर उसकी बहाली के नाम पर अवैध वसूली की जाती है।
बजट में हेराफेरी: जनपद स्तर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और सरकारी आयोजनों के बजट में बड़े पैमाने पर गबन का दावा किया गया है।
नियमों की अनदेखी: पत्र में यह भी कहा गया है कि परिषदीय लिपिकों (Clerks) से कार्यालय का कार्य लिया जा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है।
BSA का पलटवार: "आरोपी ही लगा रहा आरोप"
इन गंभीर आरोपों पर बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) दिव्या गुप्ता ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि विनीत गंगवार स्वयं विभिन्न विभागीय जांचों और आरोपों के घेरे में हैं। इसी कारण उन्हें पूर्व में निलंबित कर संबद्ध किया गया था। विभाग इसे एक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देख रहा है।
कार्यालय में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट
भ्रष्टाचार के इन आरोपों और हाल ही में एंटी-करप्शन टीम द्वारा की गई कार्रवाइयों के बीच, बीएसए कार्यालय में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की संभावना बढ़ गई है।
पटल परिवर्तन: लंबे समय से एक ही सीट (पटल) पर जमे लिपिकों को हटाया जा सकता है।
पारदर्शिता की कोशिश: बीएसए ने स्पष्ट किया है कि नए सत्र की शुरुआत में पटल परिवर्तन की प्रक्रिया एक सामान्य प्रशासनिक कदम है, जिसे जल्द ही पूरा किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

