UP में शिक्षकों पर संकट: 2 साल में TET पास नहीं किया तो मिलेगी 'जबरन रिटायरमेंट', शुरू हुई कोचिंग की दौड़
बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में तैनात बिना टीईटी परीक्षा पास शिक्षक-शिक्षिकाएं अब अपनी नौकरी बचाने के प्रयास में लगे हुए हैं। ऐसे शिक्षक जहां भी मौका मिलता है, वहां मोबाइल पर पढ़ाई करने में जुट जाते हैं। खास बात ये है कि इन दिनों परिषदीय स्कूलों में नामांकन प्रक्रिया भी चल रही है लेकिन नौकरी बचाने में लगे शिक्षक-शिक्षिकाएं उस पर ध्यान कम दे पा रहे हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों के निरीक्षण के समय ऐसे शिक्षक-शिक्षिकाएं अपनी कक्षाओं में गंभीरता से पढ़ाते नजर आते हैं।
सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला देते हुए कहा था कि बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में नौकरी कर रहे सभी शिक्षकों-शिक्षिकाओं को शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। भले ही उन शिक्षकों की नियुक्ति आरटीई 2009 के लागू होने से पहले क्यों न हुई हो, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि ऐसे शिक्षकों को दो वर्ष के अंदर टेट परीक्षा पास करना होगा।
अन्यथा उन्हें जबरन रिटायरमेंट दे दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षकों में काफी खलबली भी मची हुई है और इस फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए शिक्षक संगठनों की ओर से विशेष अपील भी दायर कराई गई है। साथ ही जनप्रतिनिधियों के माध्यम से संसद में विशेष कानून बनाकर 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टेट से मुक्ति दिलाए जाने की मांग की गई है
हालांकि सरकार की ओर से अभी तक किसी तरह का आश्वासन नहीं मिला है। शिक्षक-शिक्षिकाएं तरह-तरह से आंदोलन करके अपने विरोध का प्रदर्शन भी कर रहे हैं। चार अप्रैल को देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली में धरना देकर शक्ति परीक्षण भी कराया। फिर भी सरकार ने उनके पक्ष में कोई फैसला नहीं लिया।
सरकार यह कह रही है कि वह शिक्षकों के साथ है लेकिन इस बीच उत्तर प्रदेश में टेट की परीक्षा के लिए आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई और उसमें शिक्षकों के लिए भी आवेदन में अलग से कई बिंदु जोड़े गए हैं। इससे शिक्षक शिक्षिकाओं को लगने लगा है कि सरकार डबल नीति अपना रही है।
इससे शिक्षक-शिक्षिकाओं ने शिक्षक पात्रता परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा जो की जुलाई माह में प्रस्तावित है। उसके लिए शिक्षक आवेदन कर रहे हैं और वह पूरी तरह से उसकी तैयारी में लहे हैं। शिक्षकों को अपनी नौकरी का खतरा सता रहा है, जिससे उन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा की तैयारियां तेज कर दी हैं।
इधर एक अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र भी शुरू हो गया है। सभी स्कूलों में नवीन नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्कूलों में तैनात शिक्षक शिक्षिकाएं इस पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैंं। कुछ शिक्षिकों का कहना है कि जब नौकरी बचेगी तो वह अपने आगे का जीवन अच्छी तरह से गुजार सकेंगे।अब उन्हें नहीं लगता कि केंद्र सरकार शिक्षकों के हित में कोई फैसला लेगी
तमाम प्रार्थना पत्र, ज्ञापन और धरना प्रदर्शन करने के बावजूद कोई आदेश में बदलाव नहीं किया गया है। इससे सभी शिक्षक शिक्षिकाएं शिक्षक पात्रता परीक्षा की तैयारियों में जुटे हैं। वह घर के अलावा स्कूलाें में भी पढ़ाई कर रहे हैं।
शिक्षकों ने ज्वाइन की है कोचिंग
किसी भी तरह से शिक्षक पात्रता परीक्षा में उत्तीर्ण हो सकें, इसके लिए अधिकांश शिक्षक शिक्षिकाओं ने आनलाइन कोचिंग या फिर आफलाइन कोचिंग ज्वाइन कर ली है। यह बात अलग है कि कुछ शिक्षकों का कहना है कि इतनी उम्र के बाद परीक्षा देना बेहद मुश्किल लग रहा है। फिर भी नौकरी के लिए परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।

