यूपी में शिक्षकों के 2.17 लाख पद रिक्त, प्राथमिक में 1.43 लाख रिक्त, केंद्र ने की सख्ती
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी एक बार फिर चर्चा में है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल 2.17 लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जिनमें से लगभग 1.43 लाख पद प्राथमिक स्तर के हैं। यह स्थिति राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।
प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में एक या दो शिक्षक ही पूरे विद्यालय का संचालन कर रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में पद रिक्त रहने से न केवल शिक्षण व्यवस्था कमजोर होती है, बल्कि सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन भी बाधित होता है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, जहां पहले से ही संसाधनों की कमी है।
📢 मुख्य बिंदु:
✔️ कुल रिक्त पद: 2.17 लाख
✔️ प्राथमिक स्तर पर रिक्त पद: 1.43 लाख
✔️ शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा सीधा असर
शिक्षा से जुड़े संगठनों और अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करे, ताकि रिक्त पदों को भरा जा सके और विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था सुचारु हो सके।
फिलहाल, प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में खाली पद सरकार के लिए एक बड़ा संकेत है कि शिक्षा क्षेत्र में त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है।
स्कूलों में शिक्षकों के पदों को लंबे समय तक नहीं भरना अब राज्यों को मंहगा पड़ सकता है। संसदीय समिति की सिफारिश पर गंभीर शिक्षा मंत्रालय अब ऐसे सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को समग्र शिक्षा के तहत दी जाने वाली वित्तीय मदद में कटौती कर सकता है या फिर रोक सकता है। फिलहाल देश में शिक्षकों के करीब 10 लाख पद खाली हैं। इनमें करीब साढ़े सात लाख पद अकेले प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के हैं।

