डॉक्टरों को अब अपने बोर्ड पर लिखनी होगी फीस और योग्यता, पारदर्शिता बढ़ाने की तैयारी
नई दिल्ली: मरीजों को बेहतर सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार डॉक्टरों की फीस और योग्यता को सार्वजनिक करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। नई योजना के तहत अब डॉक्टरों को अपने क्लीनिक और अस्पताल के बाहर बोर्ड पर अपनी फीस, शैक्षणिक योग्यता और रजिस्ट्रेशन नंबर स्पष्ट रूप से लिखना अनिवार्य होगा।
सरकार का उद्देश्य है कि मरीजों को इलाज से पहले ही सभी जरूरी जानकारी मिल सके, जिससे अनावश्यक भ्रम और मनमानी फीस वसूली पर रोक लगे। इस योजना में क्लीनिकों और अस्पतालों के लिए कुछ बुनियादी मानक भी तय किए जा रहे हैं।
न्यूनतम सुविधाएं और मानक होंगे अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार प्रत्येक क्लीनिक में एक स्वागत कक्ष (रिसेप्शन) होना जरूरी होगा। इस कक्ष का न्यूनतम आकार 70 वर्ग फुट निर्धारित किया गया है। वहीं, मरीजों के बैठने की उचित व्यवस्था, साफ-सफाई, रोशनी और वेंटिलेशन का भी विशेष ध्यान रखना होगा।
इसके अलावा, डॉक्टरों को अपने क्लीनिक में दी जाने वाली सेवाओं की स्पष्ट सूची प्रदर्शित करनी होगी। जहां मरीजों के आराम के लिए बेड की व्यवस्था होगी, वहां प्रत्येक बेड के लिए कम से कम 65 वर्ग फुट जगह अनिवार्य की गई है। रिसेप्शन और वेटिंग एरिया के लिए न्यूनतम 35 वर्ग फुट स्थान निर्धारित किया गया है।
डिस्पेंसरी और डायग्नोस्टिक सेंटर भी दायरे में
यह नियम केवल डॉक्टरों के क्लीनिक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिस्पेंसरी, डायग्नोस्टिक सेंटर और डे-केयर सुविधाओं पर भी लागू होगा। सरकार इन संस्थानों के लिए भी एक समान मानक लागू करने की तैयारी में है, ताकि मरीजों को हर जगह एक जैसी सुविधाएं मिल सकें।
दवाओं के स्टॉक में जरूरी दवाएं अनिवार्य
क्लीनिकों में कुछ आवश्यक दवाओं का स्टॉक रखना भी अनिवार्य किया जाएगा। इसमें दर्द निवारक, एंटीबायोटिक, एलर्जी और आपातकालीन दवाएं शामिल होंगी, ताकि मरीजों को तत्काल प्राथमिक उपचार मिल सके।
निजी अस्पतालों ने किया स्वागत
निजी स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे मरीजों का भरोसा बढ़ेगा और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता आएगी। साथ ही, क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी प्रदर्शित करने से आम लोगों को समझने में आसानी होगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम
देश में वर्तमान में लाखों डॉक्टर और हजारों निजी स्वास्थ्य संस्थान कार्यरत हैं। ऐसे में यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

