मद्रास जजमेंट बनेगी सभी टेट शिक्षकों की सेवाएं सुरक्षित करने हेतु संजीवनी
मद्रास जजमेंट जो कि पदोन्नति को लेकर निर्णीत है उसी को केंद्र सरकार की लचर पैरवी और ग़लत तथ्यों के कारण माननीय सर्वोच्च न्यायालय से ट्विस्ट किया गया और देश भर के कार्यरत शिक्षकों पर टेट लागू कर दी गई,जिसको जस्टिस दत्ता अपने निर्णय में स्वयं कह रहे हैं कि ये हमारे लिए हार्स होगा लेकिन केंद्र द्वारा वर्ष 2017 में किये गए संशोधन और एनसीटीई द्वारा स्वीकारने पर आर्टिकल 21 के मद्देनजर हमें ये निर्णय देना पड़ रहा है ।
इसकी हकीकत अब समस्त शिक्षक जान चुके हैं।
*क्या है मद्रास जजमेंट?*
*100th paragraph पढ़ लीजिएगा बस जो पहले से नियुक्त हैं (29.07.2011 से पूर्व) उन्हें टेट उत्तीर्ण करने की जरूरत नहीं है।
*जो पहले से नियुक्त हैं (29.07.2011 से पूर्व) अगर उन्हें पदोन्नत होना है तो टेट करना अनिवार्य है।
*जो पहले से नियुक्त हैं (29.07.2011 से पूर्व) अगर वे पदोन्नति हेतु टेट नहीं कर पाते हैं तो वे सेवा में बने रहेंगे उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा और सरकार द्वारा समय समय पर दिए जाने वाले भत्ते उन्हें मिलेंगे।
*29.07.2011 के पश्चात हुई कोई भी नियुक्ति या पदोन्नति के लिए टेट पास करना अनिवार्य होगा।
फिलहाल में जो भी रिव्यू पड़ी हैं उनमें पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को (29.07.2011 से पूर्व) टेट अनिवार्यता से छूट मिलेगी लेकिन पदोन्नति के लिए टेट करना अनिवार्य होगा ।
ये बात ही शुरू से कहता आ रहा हूँ।
एनसीटीई द्वारा इन बातों को एक बार नहीं नवंबर 2014 से अब तक कई बार स्पष्ट भी किया जा चुका है और मद्रास उच्च न्यायालय के निर्णय में स्वीकारा भी गया है कि पदोन्नति हेतु टेट करना अनिवार्य है
