शिक्षक भर्ती में देरी पर केंद्र सख्त, राज्यों की वित्तीय मदद रुकने के संकेत: देखें कहां कितने पद खाली
नई दिल्ली: देशभर में सरकारी स्कूलों में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षक पदों को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। यदि राज्य समय पर भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं करते हैं, तो उन्हें मिलने वाली केंद्रीय वित्तीय सहायता पर रोक लगाई जा सकती है। यह संकेत शिक्षा मंत्रालय की ओर से संसदीय समिति की सिफारिशों के बाद सामने आए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, देश में करीब 10 लाख से अधिक शिक्षक पद खाली हैं, जिनमें बड़ी संख्या प्राथमिक स्तर के पदों की है। कई राज्यों में वर्षों से भर्ती प्रक्रिया लंबित है, जिससे स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
केंद्र सरकार ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के तहत राज्यों को हर साल बड़ी वित्तीय सहायता देती है, जिसका उद्देश्य स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। लेकिन अब यह स्पष्ट किया गया है कि यदि राज्य खाली पदों को भरने में लापरवाही बरतते हैं, तो इस फंड की समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर इसे रोका भी जा सकता है।
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि शिक्षक पदों का लंबे समय तक खाली रहना गंभीर चिंता का विषय है। शिक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए जरूरी है कि राज्यों द्वारा नियमित और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया अपनाई जाए।
आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में शिक्षक पद रिक्त हैं। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में करीब 2 लाख से अधिक पद खाली बताए गए हैं, जबकि बिहार में भी लगभग 1.9 लाख पद रिक्त हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द भर्ती नहीं की गई, तो न केवल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी बल्कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य भी अधूरा रह जाएगा। ऐसे में केंद्र का यह सख्त रुख राज्यों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा क्षेत्र में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार की इस संभावित कार्रवाई से आने वाले समय में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

