एआई ने बिना डांट पढ़ाया, छात्रों की सीखने की क्षमता हुई दोगुनी: शोध
कानपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब शिक्षा के क्षेत्र में भी तेजी से प्रभाव दिखा रहा है। छात्रों को एआई के माध्यम से पढ़ाया गया पाठ अधिक आसानी से समझ में आ रहा है। खास बात यह रही कि एआई ने बिना डांट-फटकार के सरल भाषा और छात्रों के मनपसंद अंदाज में पढ़ाई कराई, जिससे उनकी सीखने की क्षमता दोगुनी हो गई।
यह खुलासा सीएसजेएमयू के शिक्षा विभाग द्वारा किए गए एक शोध में हुआ है। शोध रिपोर्ट के अनुसार एआई आधारित शिक्षण से छात्रों में विषय को लेकर रुचि बढ़ी, आत्मविश्वास में सुधार हुआ और उनकी रचनात्मकता भी विकसित हुई। छात्रों ने नई सोच और विचार प्रस्तुत करने में भी बेहतर प्रदर्शन किया।
शोध में कुल 60 छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया। इनमें 30 छात्रों को पारंपरिक तरीके से पढ़ाया गया, जबकि 30 छात्रों को एआई आधारित शिक्षण सामग्री के माध्यम से पढ़ाई कराई गई। परिणामों में पाया गया कि एआई से पढ़ने वाले छात्रों ने विषय को बेहतर ढंग से समझा और वे अधिक उत्साहित दिखाई दिए।
छात्रों का कहना था कि एआई तुरंत यह बता देता है कि वे कहां गलती कर रहे हैं और उसे कैसे सुधारना है। उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई पर्सनल ट्यूटर हर समय उनके साथ मौजूद हो। एआई से सवाल पूछने में भी उन्हें झिझक महसूस नहीं हुई।
शोध निदेशक डॉ. विमल सिंह के मार्गदर्शन में शोधार्थी सौम्या त्रिपाठी ने यह अध्ययन किया। उनका कहना है कि एआई छात्रों की जरूरत, कमजोरी और सीखने की गति के अनुसार अध्ययन सामग्री तैयार कर सकता है, जिससे पढ़ाई अधिक प्रभावी बनती है। यह शोध कार्य राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशन के लिए भी स्वीकार किया गया है।
वहीं दूसरी ओर एक अन्य अध्ययन में यह सामने आया कि स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग किशोरों की याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है। पीपीएन कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग द्वारा किए गए अध्ययन में 100 बच्चों पर शोध किया गया। इसमें पाया गया कि जो किशोर मोबाइल का सीमित उपयोग करते हैं, उनकी याददाश्त और एकाग्रता बेहतर होती है, जबकि लंबे समय तक स्क्रीन पर रहने वाले बच्चों में ध्यान भटकने और याददाश्त कमजोर होने की समस्या अधिक देखी गई।

