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Tuesday, May 5, 2026

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: साथ रहते जन्मा बच्चा पति की ही वैध संतान, बिना वैध कानून के तलाक अमान्य

 हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: साथ रहते जन्मा बच्चा पति की ही वैध संतान, बिना वैध कानून के तलाक अमान्य


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पारिवारिक मामलों से जुड़े दो अहम फैसलों में महत्वपूर्ण स्पष्टता दी है। अदालत ने कहा है कि यदि पति-पत्नी साथ रह रहे हों और उस दौरान बच्चे का जन्म होता है, तो वह बच्चा पति की ही वैध संतान माना जाएगा।




🔹 डीएनए टेस्ट पर सख्त रुख




कोर्ट ने साफ किया कि पितृत्व निर्धारण के लिए डीएनए टेस्ट हर मामले में जरूरी नहीं है। यह परीक्षण तभी कराया जा सकता है जब यह ठोस रूप से साबित किया जाए कि बच्चे के गर्भधारण के समय पति-पत्नी के बीच कोई संपर्क नहीं था।




इस मामले में हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय, आगरा के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें डीएनए टेस्ट कराने से इनकार किया गया था। न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला की पीठ ने कहा कि बिना पर्याप्त आधार के डीएनए टेस्ट का आदेश देना उचित नहीं है।




🔹 तलाक की अवैध डिक्री को किया रद्द




एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट ने बरेली परिवार न्यायालय द्वारा दी गई तलाक की डिक्री को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने पाया कि तलाक ऐसे कानून के तहत दिया गया था, जो पहले ही समाप्त हो चुका था।




अदालत ने इसे अवैध करार देते हुए संबंधित न्यायिक आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि कानून के अस्तित्व में न होने पर उसके आधार पर दिया गया फैसला मान्य नहीं हो सकता।




🔹 बच्चे की वैधता पर कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी




हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि विवाह के दौरान जन्म लेने वाले बच्चे को वैध संतान माना जाता है। इस धारणा को केवल ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर ही चुनौती दी जा सकती है।




✅ क्या है फैसले का महत्व?


पितृत्व विवादों में डीएनए टेस्ट को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश


बच्चों के अधिकारों और वैधता की सुरक्षा

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